इंदौर। नगर निगम में सफाई कर्मचारियों ने वर्षों से लंबित मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारियों ने निगम परिसर में धरना शुरू करते हुए 48 घंटे की हड़ताल का ऐलान किया है। यूनियन के समर्थन में शुरू हुए आंदोलन के पहले दिन कर्मचारियों के मुताबिक करीब 90 फीसदी सफाई कर्मचारी काम से दूर रहे।
23 साल से लंबित हैं प्रमुख मांगें
सफाई कर्मचारियों का कहना है कि उनकी कई मांगें पिछले 23 वर्षों से लंबित हैं। इस दौरान सरकार और प्रशासन को कई बार ज्ञापन सौंपे गए और अलग-अलग तरीकों से आंदोलन किए गए। कर्मचारियों के अनुसार, इसके बावजूद कई प्रमुख मांगों पर अब तक ठोस निर्णय नहीं हुआ है।
स्थायी नौकरी की उठी मांग
कर्मचारियों ने स्थायीकरण को अपनी प्रमुख मांग बनाया है। इसके साथ ही एनजीओ और निजी कंपनियों के बजाय सफाई व्यवस्था में कर्मचारियों को सीधे नगर निगम के माध्यम से रोजगार देने की मांग की गई है। कर्मचारियों का कहना है कि इससे रोजगार की स्थिरता और सेवा से जुड़े अधिकार सुनिश्चित होंगे।
700 से ज्यादा कर्मचारियों की बहाली
आंदोलन में हटाए गए 700 से ज्यादा सफाई कर्मचारियों की दोबारा बहाली का मुद्दा भी उठाया गया है। इसके अलावा मेडिकल आधार पर नियुक्तियां करने की मांग भी कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि इन मुद्दों पर लंबे समय से समाधान का इंतजार किया जा रहा है।
पहले भी कई बार हो चुके आंदोलन
कर्मचारी प्रतिनिधियों के मुताबिक, मांगों को लेकर वाहन रैली, भूख हड़ताल, अनशन और मानव श्रृंखला जैसे आंदोलन किए जा चुके हैं। हाल ही में कर्मचारियों ने करीब 13 दिनों तक भूख हड़ताल भी की थी। इसके बावजूद समाधान नहीं निकलने से कर्मचारियों में नाराजगी बनी हुई है।
48 घंटे की हड़ताल से व्यवस्था पर असर
कर्मचारी प्रतिनिधियों का दावा है कि निगम आयुक्त की ओर से मांगों को लेकर राज्य शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। प्रस्ताव के करीब दो महीने बाद भी निर्णय नहीं होने का आरोप लगाते हुए कर्मचारियों ने फिर आंदोलन शुरू किया है। अब 48 घंटे की हड़ताल के बीच निगम की सफाई व्यवस्था और प्रशासन के अगले कदम पर नजर है।