आदेश दिव्यांग स्वास्थ्य सुविधा

उज्जैन के सेवाधाम आश्रम में 1000 से ज्यादा लोगों की सेहत पर हाईकोर्ट सख्त

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सेवाधाम आश्रम में दिव्यांग और मानसिक रूप से बीमार लोगों के लिए नियमित डॉक्टर और नर्सिंग केयर यूनिट स्थापित करने के निर्देश दिए हैं।

By : दिव्या मिस्त्री
उज्जैन के सेवाधाम आश्रम में 1000 से ज्यादा लोगों की सेहत पर हाईकोर्ट सख्त

उज्जैन के सेवाधाम आश्रम में रह रहे एक हजार से ज्यादा दिव्यांग और मानसिक रूप से बीमार लोगों की स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अहम आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि समाज के सबसे कमजोर वर्ग से आने वाले इन लोगों को लगातार चिकित्सा निगरानी और उपचार की जरूरत है। इनकी स्वास्थ्य व्यवस्था को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

आश्रम में डॉक्टर और नर्सिंग केयर यूनिट के निर्देश

हाईकोर्ट ने राज्य शासन को सेवाधाम आश्रम में कम से कम एक डॉक्टर और नर्सिंग केयर यूनिट स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने इसके लिए शासन को दो सप्ताह का समय दिया है। साथ ही 21 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई में इस संबंध में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने को कहा है।

एक साल में 17 बच्चों की मौत के बाद स्वत: संज्ञान

सेवाधाम आश्रम में एक वर्ष के दौरान 17 बच्चों की मौत की जानकारी सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने मामले का स्वत: संज्ञान लिया था। इसके बाद जनहित याचिका पर सुनवाई शुरू हुई। कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता अमित एस. अग्रवाल को न्याय मित्र नियुक्त किया। उन्होंने आश्रम का दौरा कर अपनी रिपोर्ट कोर्ट के सामने पेश की।

आश्रम में नियमित डॉक्टर नहीं होने की बात सामने आई

न्याय मित्र की रिपोर्ट में बताया गया कि सेवाधाम आश्रम में कोई नियमित डॉक्टर नहीं है। डॉक्टर के आने पर उनकी मौजूदगी में मरीजों की जांच कर दवाएं दी जाती हैं। आश्रम में बड़ी संख्या दिव्यांग और मानसिक रूप से बीमार लोगों की है, जिन्हें लगातार निगरानी और उपचार की आवश्यकता होती है।

वृद्धाश्रम के रूप में पंजीकृत है सेवाधाम

शासन ने अपने जवाब में बताया कि सेवाधाम आश्रम का पंजीयन वृद्धाश्रम के रूप में है, मेडिकल सेंटर के तौर पर नहीं। इसी कारण वहां नियमित डॉक्टर और नर्सिंग केयर यूनिट की व्यवस्था नहीं है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब एक समय में एक हजार से ज्यादा लोग आश्रम में रहते हैं, तो उनकी चिकित्सा जरूरतों को कैसे नजरअंदाज किया जा सकता है।

सरकार की भी है स्वास्थ्य सुविधा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी

हाईकोर्ट ने सेवाधाम द्वारा दिव्यांग और मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण लोगों की सेवा को सराहनीय माना। कोर्ट ने कहा कि गरीब और असहाय मरीजों की जिंदगी केवल किसी व्यक्ति की दया पर निर्भर नहीं रह सकती। उनकी चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करना राज्य सरकार की भी जिम्मेदारी है।

संबंधित सामग्री

भोपाल में ‘आयुष्मान योजना बंद’ के बैनर, अस्पतालों ने निकाली एम्बुलेंस रैली; 8 अक्टूबर से बहिष्कार की चेतावनी

भोपाल में ‘आयुष्मान योजना बंद’ के बैनर, अस्पतालों ने निकाली एम्बुलेंस रैली; 8 अक्टूबर से बहिष्कार की चेतावनी

भोपाल में निजी अस्पताल संचालकों ने आयुष्मान भारत योजना के खिलाफ अनिश्चितकालीन बहिष्कार की चेतावनी दी, भुगतान अटकने से नाराजगी।

गुना अस्पताल में नहीं मिला स्ट्रेचर! दिव्यांग भाई को कंधे पर लेकर वार्ड तक पहुंची बहन

गुना अस्पताल में नहीं मिला स्ट्रेचर! दिव्यांग भाई को कंधे पर लेकर वार्ड तक पहुंची बहन

गुना के अस्पताल में एक वीडियो सामने आया है जिसमें एक महिला अपने दिव्यांग भाई को कंधे पर उठाये हुए दिख रही है, क्योंकि उन्हें स्ट्रेचर नहीं मिला।

सीएम योगी से मिली स्टार्टअप को नई दिशा, इमरजेंसी हेल्थकेयर में तकनीक से बदलेगी तस्वीर

सीएम योगी से मिली स्टार्टअप को नई दिशा, इमरजेंसी हेल्थकेयर में तकनीक से बदलेगी तस्वीर

लखनऊ स्थित हिंदकेयर मेडटेक स्टार्टअप ने इमरजेंसी हेल्थकेयर में तकनीकी नवाचार किया है, जिससे दुर्घटना के समय बेहतर समन्वय स्थापित हो सके।

योगी सरकार पीडियाट्रिक ट्रॉमा इंटीग्रेशन से हर साल बचाएगी करीब 1,800 जानें

योगी सरकार पीडियाट्रिक ट्रॉमा इंटीग्रेशन से हर साल बचाएगी करीब 1,800 जानें

योगी सरकार ने बाल ट्रॉमा केयर प्रणाली को मजबूत करने के लिए नया रोडमैप तैयार किया, जिसमें गंभीर दुर्घटनाओं के बाद बच्चों को तत्काल चिकित्सा सहायता मिल सकेगी।

मोनालिसा के जन्म प्रमाण पत्र विवाद में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पहला जन्म प्रमाण पत्र रद्द करने का आदेश निरस्त

मोनालिसा के जन्म प्रमाण पत्र विवाद में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पहला जन्म प्रमाण पत्र रद्द करने का आदेश निरस्त

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मोनालिसा भोंसले के जन्म प्रमाण पत्र विवाद में पहले जारी प्रमाणपत्र को रद्द करने का आदेश निरस्त किया है।

Advertisement

सेवा के 25 वर्ष 14 सितम्बर से  13 ऑक्टोबर