भोपाल। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा महिला सुरक्षा और आश्रम के सेवादारों को लेकर दिए गए हालिया बयान पर अब साधु-संत समाज के भीतर से ही आपत्ति सामने आई है। भोपाल में अनिलानंद महाराज ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान पर सख्त प्रतिक्रिया देते हुए इसे सनातन परंपरा और आश्रम व्यवस्था के अनुरूप नहीं बताया। उन्होंने कहा कि किसी संत या धार्मिक संस्थान से जुड़े विषय पर बयान देते समय आश्रमों की परंपरा और वहां सेवा करने वाले लोगों की भावनाओं का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
धीरेंद्र शास्त्री का सम्मान, लेकिन बयान से असहमति
अनिलानंद महाराज ने मीडिया से चर्चा के दौरान कहा कि वे धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का व्यक्तिगत रूप से बहुत सम्मान करते हैं और उनके धार्मिक कार्यों को भी मानते हैं। हालांकि, महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर आश्रम के सेवादारों पर भरोसा नहीं करने की बात उन्हें उचित नहीं लगी। उन्होंने कहा कि लाखों श्रद्धालु और सेवादार देशभर के अलग-अलग आश्रमों में पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ सेवा करते हैं।
‘सेवादारों पर भरोसा न करने की बात गलत’
अनिलानंद महाराज ने कहा कि आश्रम व्यवस्था में सेवादारों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। श्रद्धालुओं की सहायता से लेकर व्यवस्था संभालने तक सेवादार लगातार अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं। ऐसे में सभी सेवादारों को संदेह की नजर से देखना उचित नहीं है। उनके मुताबिक किसी एक घटना या आशंका के आधार पर पूरी आश्रम व्यवस्था और सेवा करने वाले लोगों पर सवाल खड़ा करना सनातन परंपरा के लिहाज से भी सही नहीं है।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी संस्थान की
अनिलानंद महाराज ने कहा कि किसी भी धार्मिक स्थल, आश्रम या संस्थान में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित संस्थान की होती है। यदि किसी महिला, बच्चे या अन्य श्रद्धालु के साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो संस्थान को इसकी जिम्मेदारी लेते हुए सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु भगवान के दर्शन और धार्मिक आस्था के लिए संस्थान में पहुंचते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
बयान पर संत समाज में बहस तेज
अनिलानंद महाराज की इस प्रतिक्रिया के बाद धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की टिप्पणी को लेकर संत समाज में चर्चा तेज हो गई है। उन्होंने साफ किया कि उनकी आपत्ति किसी व्यक्ति विशेष के प्रति नहीं है, बल्कि उस बयान को लेकर है जिसे वे आश्रम व्यवस्था और सेवादारों के सम्मान के लिहाज से उचित नहीं मानते।