Budayun Daroga Suicide: उत्तरप्रदेश के बदायूं में एक किराए के कमरे में दरोगा का शव फंदे पर लटकता मिला। जब शव मिला वो घुटने के बल बैठे हुए पोजिशन था। लेकिन घटना स्थल से कोई भी सुसाइट नोट बरामद नहीं किया गया है।
जिस कमरे में शव मिला वो कमरा अंदर से बंद था। मकान मालिक ने पुलिस को घटना की सूचना दी।
पुलिस को दी जानकारी
जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। SP ने बताया कि- 'दरोगा मेघश्याम गौतम (55) कोर्ट सुरक्षा में तैनात थे। वो मूलरूप से मथुरा के गोविंदनगर थाना के सकना गांव के रहने वाले थे। मोबाइल फोन जब्त करके कॉल डिटेल निकलवाई जा रही है। फॉरेंसिक टीम ने भी जांच की है। परिजनों से पूछताछ और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। घटना नगर कोतवाली क्षेत्र के मधुबन कॉलोनी की है।'
वहीं मृतक की पहचान दरोगा मेघश्याम गौतम के रुप में हुई, जिनकी उम्र 55 है। वो मूलरूप से मथुरा के गोविंदनगर थाना के सकना गांव के रहने वाले थे।
मकान मालिक का बयान
मकान मालिक विकेश ने बताया कि- 'उनका दो मंजिला मकान है। दरोगा मेघश्याम गौतम पिछले एक साल से फर्स्ट फ्लोर पर रह रहे थे। उसी फ्लोर पर दो अन्य परिवार भी रहते हैं। घटना के समय मैं गांव गया हुआ था। गुरुवार सुबह करीब 9 बजे मेघश्याम की बेटी का फोन आया। उसने बताया कि काफी देर से फोन लगाने पर भी संपर्क नहीं हो पा रहा है।'
आगे बताया कि-
'मैंने यह बात फोन पर पत्नी को बताई। पत्नी ने दरोगा के कमरे का दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद मैं गांव से घर आया और पुलिस को जानकारी दी। पुलिस ने दरवाजा तोड़ा तो अंदर मेघश्याम का शव फंदे से लटका हुआ मिला।'
मकान मालिक ने बताया कि-
'मेघश्याम के कमरे का एक गेट छत की ओर बाहर की तरफ खुलता है। पर दोनों गेट अंदर से बंद थे। जिस दरवाजे के रोशनदान से शव लटका मिला, वह भी अंदर से बंद था।'

एसपी अंकिता शर्मा का बयान
SP ने बताया कि- 'सुबह 9:45 बजे सूचना मिली कि दरोगा मेघश्याम ने सुसाइड कर लिया है। टीम उनके घर पहुंची तो उनका शव कमरे में साढ़े छह फीट के दरवाजे के ठीक ऊपर बनी खिड़की (रोशनदान) की ग्रिल से गमछे के फंदे के सहारे लटका मिला। प्रथम दृष्टया मामला सुसाइड का लग रहा है। हालांकि, कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है।'
1986 में बने थे सिपाही
सहकर्मियों ने बताया कि- 'मेघश्याम बुधवार शाम को ड्यूटी से 6 बजे अपने घर चले गए थे। उनका व्यवहार सामान्य ही था। किसी तरह की परेशानी का जिक्र नहीं किया था। सब से हंसी-मजाक से पेश आते थे। वे 1986 में सिपाही पद पर पुलिस सेवा में भर्ती हुए थे। इसके बाद दरोगा पद पर प्रमोट हो गए। 2024 में बरेली से ट्रांसफर होकर बदायूं आए थे।'
गांव में ही रहता था दरोगा का परिवार
दरोगा मेघश्याम का परिवार मथुरा के गोविंदनगर थाना के सकना गांव में ही रहते थे। दरोगा के परिवार में उसकी पत्नी 2 बेटे और 1 बेटी है, जिसमें से 1 बेटे की शादी हो चुकी है।