जम्मू-कश्मीर में होने वाली पवित्र अमरनाथ यात्रा से पहले बाबा बर्फानी की पहली तस्वीरें सामने आ गई हैं। तस्वीरों में बर्फ से बना प्राकृतिक शिवलिंग स्पष्ट दिखाई दे रहा है, जिसका आकार करीब 5 से 6 फीट बताया जा रहा है।यात्रा शुरू होने से पहले सुरक्षा में तैनात BSF जवानों ने सबसे पहले बाबा बर्फानी के दर्शन किए। इस बार अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई 2026 से शुरू होकर 9 अगस्त 2026 तक चलेगी। श्रद्धालुओं में इसे लेकर खास उत्साह देखा जा रहा है।

अमरनाथ यात्रा के लिए 3.6 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रेशन

प्रशासन के मुताबिक इस साल अब तक 3.6 लाख से ज्यादा श्रद्धालु यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि यात्रा शुरू होने तक यह संख्या 5 लाख के पार पहुंच सकती है।रजिस्ट्रेशन 15 अप्रैल से शुरू हुए थे। फिलहाल पंजाब नेशनल बैंक, जम्मू-कश्मीर बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और यस बैंक की चुनिंदा शाखाओं के जरिए पंजीकरण प्रक्रिया जारी है।
57 दिन चलेगी यात्रा, दो मार्गों से होंगे दर्शन
अमरनाथ यात्रा इस बार बालटाल-सोनमर्ग और पारंपरिक नुनवान-पहलगाम मार्ग से संचालित होगी। 57 दिनों तक चलने वाली यह यात्रा रक्षा बंधन और सावन पूर्णिमा के दिन संपन्न होगी।श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को देखते हुए प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। यात्रा मार्गों पर लगातार बर्फ हटाने और ट्रैक सुधार का काम जारी है।
रास्तों पर अब भी 10 से 12 फीट तक बर्फ
अधिकारियों के अनुसार कई हिस्सों में अभी भी भारी बर्फ जमा है। सामान्य इलाकों में 6 से 8 फीट और हिमस्खलन वाले क्षेत्रों में 10 से 12 फीट तक बर्फ मौजूद है।सीमा सड़क संगठन (BRO) दोनों रास्तों को यात्रा के लिए तैयार करने में जुटा है। बालटाल मार्ग पर 9 किलोमीटर और पहलगाम मार्ग पर 8 किलोमीटर तक ट्रैक से बर्फ हटाई जा चुकी है। प्रशासन का दावा है कि 15 जून तक दोनों मार्ग पूरी तरह तैयार कर दिए जाएंगे।
इस बार टेंट नहीं, प्री-फैब्रिकेटेड स्ट्रक्चर में ठहरेंगे श्रद्धालु
इस बार अमरनाथ यात्रा में श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं देने के लिए बेस कैंप में टेंट की जगह प्री-फैब्रिकेटेड और फाइबर स्ट्रक्चर तैयार किए जा रहे हैं।हर इमारत में 48 कमरे बनाए गए हैं, जिनमें अटैच्ड वॉशरूम, गर्म और ठंडे पानी की सुविधा तथा पैंट्री जैसी व्यवस्थाएं होंगी। प्रशासन का कहना है कि खराब मौसम और अचानक तापमान गिरने की स्थिति में ये स्ट्रक्चर ज्यादा सुरक्षित साबित होंगे।
संवेदनशील इलाकों को बनाया गया ‘नो-एंट्री जोन’
बादल फटने और अचानक बाढ़ जैसी घटनाओं को देखते हुए इस बार प्रशासन ने अतिरिक्त सतर्कता बरती है। यात्रा मार्ग के संवेदनशील हिस्सों और आपदा संभावित क्षेत्रों को ‘नो-एंट्री जोन’ घोषित किया गया है।बालटाल और पहलगाम दोनों ट्रैक को पहले से ज्यादा चौड़ा किया गया है। पुलों और सुरक्षा इंतजामों को भी मजबूत किया गया है ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित यात्रा अनुभव मिल सके।