ऑपरेशन सिंदूर पूरा नहीं, जरूरत पड़ने पर हो सकता है सिंदूर 2.0- सेना प्रमुख

Army Chief On Operation Sindoor 2.0 Readiness

ऑपरेशन सिंदूर पूरा नहीं, जरूरत पड़ने पर हो सकता है सिंदूर 2.0- सेना प्रमुख

सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी पूरा नहीं हुआ है और जरूरत पड़ने पर ऑपरेशन सिंदूर 2.0 शुरू किया जा सकता है।

ऑपरेशन सिंदूर पूरा नहीं जरूरत पड़ने पर हो सकता है सिंदूर 20-  सेना प्रमुख

जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और वर्तमान स्थिति को केवल संघर्ष विराम की अवस्था माना जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि आवश्यकता पड़ी तो भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना संयुक्त रूप से ‘ऑपरेशन सिंदूर 2.0’ के लिए पूरी तरह तैयार हैं। सेना प्रमुख ने यह बात पुणे के राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खड़कवासला में आयोजित 150वीं पासिंग आउट परेड के दौरान कही। उन्होंने रिव्यूइंग ऑफिसर के रूप में 355 कैडेट अधिकारियों की परेड की सलामी भी ली।

ऑपरेशन सिंदूर ने स्थापित किया नया मानक

जनरल द्विवेदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह मानक स्थापित किया है कि भारत किसी भी उकसावे का जवाब किस प्रकार देता है। उन्होंने पास आउट हो रहे कैडेटों से कहा कि वे अपने सैन्य जीवन की शुरुआत से ही इस पेशेवर मानक और सैन्य परंपरा को बनाए रखें। सेना प्रमुख ने कहा कि आधुनिक युद्ध अब पूरी तरह पारदर्शी हो चुका है, जहां 24 घंटे निगरानी और सूचना प्रवाह जारी रहता है। ऐसे में सैनिकों की तैनाती, सैन्य अभियानों और सीमावर्ती क्षेत्रों में नागरिकों की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता आवश्यक हो गई है।उन्होंने कहा कि सूचना युद्ध (इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर) में सफलता तभी संभव है जब नागरिकों का संस्थाओं और सूचना स्रोतों पर विश्वास बना रहे।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका बढ़ेगी

जनरल द्विवेदी के अनुसार भविष्य के युद्धों में तेज निर्णय क्षमता सबसे महत्वपूर्ण होगी। इसके लिए ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि बड़ी मात्रा में तकनीक और संसाधनों के प्रभावी संचालन के लिए AI आधारित प्रणालियां सैन्य अभियानों का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेंगी।

भविष्य के युद्ध साइबर और अंतरिक्ष में भी

सेना प्रमुख ने कहा कि आने वाले समय में युद्ध केवल जमीन, समुद्र और आकाश तक सीमित नहीं रहेंगे। साइबर स्पेस, अंतरिक्ष और उभरती प्रौद्योगिकियां भी भविष्य के संघर्षों के प्रमुख क्षेत्र होंगे। उन्होंने बताया कि भारतीय सेना ‘डिकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन’ पहल के तहत स्वयं को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप आधुनिक बना रही है।

24 विदेशी कैडेट भी हुए पास आउट

NDA की इस पासिंग आउट परेड में 12 मित्र देशों के 24 विदेशी कैडेट भी शामिल रहे। जनरल द्विवेदी ने कहा कि विभिन्न देशों से आने के बावजूद NDA ने सभी कैडेटों को समान सैन्य मूल्यों, अनुशासन और नेतृत्व की भावना से जोड़ा है। परेड के दौरान कैडेटों ने मार्च पास्ट किया, जबकि फ्लाईपास्ट में Su-30 MKI लड़ाकू विमान, चेतक हेलिकॉप्टर, सारंग एरोबेटिक्स टीम और आकाशगंगा स्काईडाइविंग टीम ने अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया।

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