UN में पाकिस्तान-चीन का बड़ा खेल नाकाम: अमेरिका ने बलूच आर्मी पर बैन का प्रस्ताव वीटो किया

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UN में पाकिस्तान-चीन का बड़ा खेल नाकाम: अमेरिका ने बलूच आर्मी पर बैन का प्रस्ताव वीटो किया

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पाकिस्तान-चीन का नाकाम प्रयास 

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अमेरिका ने बलूच आर्मी पर बैन का प्रस्ताव क्यों वीटो किया?

blouch liberation army ban: पिछले कुछ दिनों में वैश्विक राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया, जब अमेरिका ने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) पर बैन लगाने के पाकिस्तान-चीन के संयुक्त प्रस्ताव पर रोक लगा दी। यह प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में रखा गया था, जिसमें पाकिस्तान और चीन ने BLA को प्रतिबंधित आतंकी संगठन घोषित करने की मांग की थी।

अमेरिका ने इस प्रस्ताव पर वीटो किया?

दूसरी ओर,

अमेरिका और उसके सहयोगी देशों, जैसे ब्रिटेन और फ्रांस ने इस प्रस्ताव का विरोध किया। इस फैसले ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चर्चा को जन्म दिया है। तो, क्या कारण था कि अमेरिका ने इस प्रस्ताव पर वीटो किया? क्या यह सिर्फ एक कूटनीतिक कदम था या इसके पीछे कुछ और गहरे कारण हैं?

बलूच आर्मी और पाकिस्तान का सुरक्षा मुद्दा

पाकिस्तान का कहना है कि BLA और उसकी मजीद ब्रिगेड अफगानिस्तान से अपना ऑपरेशन चलाते हैं, और ये संगठन सीमा पार पाकिस्तान में आतंकवादी हमलों की जिम्मेदारी लेते हैं। पाकिस्तान का आरोप है कि यह आतंकवाद पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौती बन चुका है। पाकिस्तान का यह भी दावा है कि BLA के आतंकी हमले पाकिस्तान की सुरक्षा स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहे हैं, और इन आतंकवादियों की गतिविधियों ने कई निर्दोष लोगों की जान ली है।

31 लोग मारे गए और 300 से ज्यादा यात्री बंधक

कई आत्मघाती हमलों और सुरक्षा बलों पर हमले करने का आरोप BLA पर है, जिनमें कराची एयरपोर्ट पर हुए हमले और ग्वादर पोर्ट अथॉरिटी के पास हुए हमले शामिल हैं। इसके अलावा, मार्च 2025 में जाफर एक्सप्रेस ट्रेन को हाईजैक कर लिया गया था, जिसमें 31 लोग मारे गए और 300 से ज्यादा यात्री बंधक बन गए थे।

BLA को आतंकी संगठन घोषित करने की कमी

हालांकि,

अमेरिका ने इसे आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया था, लेकिन संयुक्त राष्ट्र में BLA पर बैन लगाने के प्रस्ताव पर वीटो करने का कारण यह था कि अमेरिका के मुताबिक, BLA को अल-कायदा जैसे संगठनों से जोड़ने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद नहीं थे। अमेरिका का यह मानना था कि इन आरोपों की पुष्टि के लिए अधिक ठोस प्रमाण की आवश्यकता है।

मार्को रूबियो,

अमेरिकी विदेश मंत्री, ने इस मसले पर कहा था कि BLA का आतंकवादी गतिविधियों से जुड़ाव निश्चित नहीं है और इसकी तुलना अल-कायदा से करना सही नहीं है।

इसके अतिरिक्त,

अमेरिका के लिए यह एक कूटनीतिक मामला भी था, क्योंकि यदि BLA को संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध सूची में डाला जाता, तो उस पर यात्रा प्रतिबंध, संपत्ति फ्रीज़, और हथियारों की खरीद पर रोक लग जाती।

बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और उसका संघर्ष

बलूचिस्तान, पाकिस्तान के सबसे बड़े प्रांतों में से एक है, और इस प्रांत के कई निवासी यह मानते हैं कि पाकिस्तान के गठन के समय उन्हें अपनी इच्छा के खिलाफ इसमें शामिल कर लिया गया था। बलूच लोग आज भी अपनी स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ रहे हैं, और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) इसी संघर्ष का सबसे प्रमुख संगठन है। यह संगठन पाकिस्तान और चीन से बलूचिस्तान को मुक्ति दिलाने की मांग करता है, और इसका मानना है कि बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों पर बलूच लोगों का अधिकार है।

BLA की शुरुआत 1970 के दशक में हुई

21वीं सदी में इसके प्रभाव में इज़ाफा हुआ है। यह संगठन पाकिस्तान के खिलाफ लगातार हमले करता है, और इन हमलों में आत्मघाती हमलों की संख्या भी बढ़ी है। 2007 में पाकिस्तान ने BLA को आतंकी संगठनों की सूची में डाला था, और आज भी यह संगठन पाकिस्तान के लिए एक गंभीर सुरक्षा खतरा बना हुआ है।

UN में पाकिस्तान-चीन की संयुक्त रणनीति पर अमेरिका का वीटो

पाकिस्तान और चीन ने इस बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में BLA और मजीद ब्रिगेड पर बैन का प्रस्ताव रखा था, लेकिन अमेरिका ने इसे वीटो कर दिया। अमेरिका का कहना था कि पाकिस्तान और चीन के आरोपों के बावजूद, BLA के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं, और इस संगठन को आतंकवादी घोषित करने का निर्णय जल्दबाजी में नहीं लिया जा सकता।
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इस वीटो के बाद, पाकिस्तान और चीन की कूटनीतिक रणनीति को एक बड़ा झटका लगा है, क्योंकि इन दोनों देशों ने BLA को वैश्विक स्तर पर आतंकवादी संगठन घोषित कराने की कोशिश की थी।

 क्या BLA पर बैन हो पाएगा?

अमेरिका का वीटो करना इस बात को दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में सब कुछ प्रमाण और उचित तथ्यों पर निर्भर करता है। पाकिस्तान और चीन की तरफ से BLA के खिलाफ प्रस्ताव को रोका जा चुका है, लेकिन यह समझने की आवश्यकता है कि आगे आने वाले समय में क्या वैश्विक सुरक्षा परिषद में इस मामले पर फिर से चर्चा होगी, या फिर कोई नया मोड़ आएगा।
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