Ashok Saraf Padma Shri Award: भारतीय सिनेमा और विशेष रूप से मराठी फिल्म इंडस्ट्री में अपना अमूल्य योगदान देने वाले वरिष्ठ अभिनेता अशोक सराफ को वर्ष 2025 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह भारत का चौथा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है। अशोक सराफ को कला क्षेत्र में उनके योगदान के लिए यह पुरस्कार दिया गया है।
Read More: Akshay on Paresh Rawal Exit: परेश रावल के ‘Hera Pheri 3’ फिल्म छोड़ने पर अक्षय ने तोड़ी चुप्पी…
आपको बता दें कि, अशोक सराफ मराठी सिनेमा के एक लोकप्रिय अभिनेता हैं, जो अपने हास्य और अभिनय के लिए जाने जाते हैं। उन्हें मराठी फिल्म उद्योग के महानायक , अशोक सम्राट या मामा के रूप में जाना जाता है।
Ashok Saraf Padma Shri Award: कला की दुनिया का चमकता सितारा..
अशोक सराफ का नाम मराठी सिनेमा, हिंदी फिल्मों और नाटक की दुनिया में बेहद सम्मान और लोकप्रियता से लिया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1969 के दशक में की थी उन्होंने ज्यादातर कॉमेडी फिल्मों में काम किया है। और जल्द ही अपने कॉमिक टाइमिंग, सहज अभिनय और दिल छू लेने वाले किरदारों के चलते दर्शकों के चहेते बन गए। उन्होंने 250 से अधिक मराठी और हिंदी फिल्मों में अभिनय किया है।

उनकी लोकप्रिय फिल्मों में "आशी ही बनवा बनवी," "प्यार किया तो डरना क्या" , "गुप्त" , "कोयला", "धूमधड़ाका," "आयत्या बिळात घोंगडी," "सिंघम," "यस बॉस" "जोरू का गुलाम" और "करण अर्जुन" जैसी फिल्में शामिल हैं। वह मराठी और हिंदी दोनों भाषाओं में समान रूप से सक्रिय रहे और उनके अभिनय में गहराई के साथ-साथ गुदगुदाने की अद्भुत क्षमता भी रही है।
थियेटर से लेकर सिनेमा तक का सफर...
अशोक सराफ ने थियेटर से अपने करियर की शुरुआत की थी। मराठी रंगमंच पर उनका योगदान अत्यंत सराहनीय रहा है। उन्होंने हास्य से लेकर गंभीर भूमिकाओं तक में दर्शकों को प्रभावित किया। उन्होंने "सख्खे शेजारी," "ऑल द बेस्ट," और "चारचौघी" जैसे नाटकों में अभिनय कर अपनी बहुआयामी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
मराठी नाटक कैरियर..
सराफ ने अपने करियर में मराठी नाटकों में कई भूमिकाएं निभाई हैं। कुछ महत्वपूर्ण नाटक हैं हमीदाबाईची कोठी , अनाधिकृत , मनो-मिलन , हे राम कार्डियोग्राम , डार्लिंग डार्लिंग , सरखा चटित दुखते , लगिंगहाई और वैक्यूम क्लीनर ।
टीवी पर भी चमका सितारा..
90 के दशक में अशोक सराफ ने टीवी पर भी अपनी पहचान बनाई। खासकर "हम पांच" जैसे लोकप्रिय टीवी शो में उन्होंने "अनुपम त्रिपाठी" के किरदार से घर-घर में पहचान बनाई। इस किरदार में उनका हास्य और संवाद अदायगी आज भी याद की जाती है।
सम्मान और योगदान की मान्यता...
अशोक सराफ को इससे पहले भी कई पुरस्कार और सम्मान मिल चुके हैं, जिनमें ग्यारह महाराष्ट्र राज्य फिल्म पुरस्कार और चार फिल्मफेयर पुरस्कार मराठी सहित कई पुरस्कार शामिल हैं। लेकिन पद्मश्री, जो भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, उन्हें उनके जीवन भर के योगदान की राष्ट्रीय स्तर पर मिली सबसे बड़ी मान्यता है। उन्हें मराठी फिल्म उद्योग के महानायक, अशोक सम्राट या मामा के रूप में जाना जाता है।
परिवार और फिल्म इंडस्ट्री में खुशी की लहर...
अशोक सराफ को पद्मश्री मिलने की घोषणा होते ही मराठी और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में खुशी की लहर दौड़ गई। उनके सहकर्मियों, प्रशंसकों और परिवार ने इस उपलब्धि को एक ऐतिहासिक पल बताया। उनकी पत्नी निर्मला सराफ ने मीडिया से बातचीत में इसे "उनकी मेहनत और सच्ची लगन का फल" बताया।
1990 में की शादी...
अशोक सराफ ने 1990 में अभिनेत्री निवेदिता जोशी-सराफ से शादी की। उन्होंने गोवा के मंगूशी मंदिर में शादी की, जहां सराफ का परिवार मूल रूप से रहता है। उनका एक बेटा है जिसका नाम अनिकेत सराफ है जो एक शेफ है।
