हरिद्वार से छड़ी यात्रा का शुभारंभ, सीएम पुष्कर सिंह धामी ने दी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं

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हरिद्वार से छड़ी यात्रा का शुभारंभ, सीएम पुष्कर सिंह धामी ने दी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं

हरिद्वार से छड़ी यात्रा का शुभारंभ सीएम पुष्कर सिंह धामी ने दी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं

Haridwar Chhari Yatra 2025: उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित श्री माया देवी मंदिर से परंपरागत छड़ी यात्रा का शुभारंभ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया। सुबह विशेष पूजा-अर्चना के बाद यात्रा का विधिवत आरंभ हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में साधु-संत, श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल के बीच यात्रा को हर-हर महादेव और जय मां गंगे के नारों के साथ रवाना किया गया।

क्या है छड़ी यात्रा?

छड़ी यात्रा उत्तराखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मान्यता है कि यह यात्रा भगवान शिव और मां गंगा की आराधना का प्रतीक है। हरिद्वार से शुरू होकर यह यात्रा पर्वतीय मार्गों से होती हुई गंगोत्री और यमुनोत्री धाम की ओर अग्रसर होती है। श्रद्धालु इस यात्रा को आस्था, भक्ति और तपस्या का माध्यम मानते हैं। पारंपरिक छड़ी (पवित्र डंडा) को ध्वज के रूप में लेकर साधु-संत और भक्तगण यात्रा के दौरान विशेष अनुष्ठान करते हैं।

Haridwar Chhari Yatra 2025: सीएम धामी ने क्या कहा?

छड़ी यात्रा के शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तराखंड की पहचान देवभूमि के रूप में पूरे विश्व में है। उन्होंने कहा –
  • "छड़ी यात्रा हमारी संस्कृति और परंपरा का अभिन्न अंग है। यह आस्था और विश्वास की जीवंत मिसाल है।"
  • "राज्य सरकार हर संभव प्रयास कर रही है कि यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।"
  • "यात्रा मार्गों की सुरक्षा, चिकित्सा सुविधा और आवागमन की व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।"
सीएम धामी ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे यात्रा के दौरान स्वच्छता और अनुशासन का विशेष ध्यान रखें। साथ ही उन्होंने श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं कि मां गंगा और भगवान शिव सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें।

हरिद्वार से हिमालय तक का अध्यात्मिक सफर

Haridwar Chhari Yatra 2025: छड़ी यात्रा केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि यह श्रद्धालुओं के लिए भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक भी है। हरिद्वार से शुरू होकर यह यात्रा हिमालयी मार्गों से गुजरते हुए देवभूमि की संस्कृति और अध्यात्म का अनुभव कराती है। साधु-संतों के साथ यह यात्रा धार्मिक एकता और सामाजिक सद्भाव का संदेश भी देती है।

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