सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। कारोबार शुरू होते ही बीएसई सेंसेक्स 800 अंक से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी 24,000 के अहम स्तर से नीचे फिसल गया। बाजार में सबसे ज्यादा दबाव आईटी और टेक्नोलॉजी सेक्टर के शेयरों पर देखने को मिला।
वैश्विक आईटी दिग्गज कंपनी एक्सेंचर द्वारा वित्त वर्ष 2026 के राजस्व वृद्धि अनुमान में कटौती के बाद निवेशकों की बिकवाली तेज हो गई, जिसका असर भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों पर भी दिखाई दिया।
खुलते ही बिखरे सेंसेक्स और निफ्टी
बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स पिछले कारोबारी सत्र के 77,409 अंक के बंद स्तर के मुकाबले 76,852 पर खुला। शुरुआती मिनटों में बिकवाली बढ़ने से यह 76,605 अंक तक लुढ़क गया, यानी करीब 804 अंकों की गिरावट दर्ज की गई।वहीं एनएसई का निफ्टी 24,168 अंक के पिछले बंद स्तर के मुकाबले 23,991 पर खुला और गिरकर 23,939 अंक तक पहुंच गया। इससे निवेशकों की धारणा पर दबाव साफ दिखाई दिया।
आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली
बाजार में गिरावट का सबसे बड़ा कारण आईटी सेक्टर बना। प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों में शुरुआती कारोबार के दौरान भारी कमजोरी दर्ज की गई।
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इंफोसिस में लगभग 8.5% गिरावट
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टीसीएस में करीब 6.2% कमजोरी
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टेक महिंद्रा में लगभग 5.6% गिरावट
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एचसीएल टेक में करीब 5.4% की गिरावट
इसके अलावा एमफैसिस, पर्सिस्टेंट सिस्टम्स और कोफोर्ज जैसे मिडकैप आईटी शेयरों में भी 4 से 7 प्रतिशत तक की कमजोरी देखने को मिली।
एक्सेंचर के अनुमान ने बढ़ाई चिंता
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार गिरावट की मुख्य वजह एक्सेंचर की ओर से वित्त वर्ष 2026 के लिए राजस्व वृद्धि अनुमान में कटौती है। कंपनी ने पश्चिम एशिया क्षेत्र से जुड़े कारोबार में चुनौतियों का हवाला दिया है।इस घोषणा के बाद अमेरिकी बाजार में एक्सेंचर के शेयर में भारी गिरावट दर्ज की गई। इसका असर भारतीय आईटी कंपनियों की अमेरिकी लिस्टेड डिपॉजिटरी रसीदों (ADR) पर भी पड़ा। इंफोसिस ADR करीब 10% टूटा, विप्रो ADR में लगभग 3.6% गिरावट दर्ज हुई चूंकि भारतीय आईटी कंपनियों का बड़ा हिस्सा विदेशी ग्राहकों, विशेषकर अमेरिका से आता है, इसलिए निवेशकों ने संभावित मांग में कमजोरी की आशंका के चलते बिकवाली बढ़ा दी।
किन शेयरों पर रहा दबाव
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एचडीएफसी बैंक
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डिक्सन टेक्नोलॉजीज
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एमफैसिस
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पर्सिस्टेंट सिस्टम्स
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कोफोर्ज
इन शेयरों में 2% से 6% तक की गिरावट दर्ज की गई।
निवेशकों के लिए संकेत?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक आईटी खर्च में सुस्ती की आशंका बढ़ती है तो निकट अवधि में भारतीय आईटी शेयरों पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए गिरावट के दौरान गुणवत्ता वाले शेयरों पर नजर रखने का अवसर भी बन सकता है।