मध्य प्रदेश में ईंधन संरक्षण अपील के बीच बड़ा राजनीतिक विवाद

विवाद ईंधन संरक्षण अपील पर

मध्य प्रदेश में ईंधन संरक्षण अपील के बीच बड़ा राजनीतिक विवाद

मध्य प्रदेश में मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी के काफिले को लेकर उठे विवाद ने प्रधानमंत्री मोदी की ईंधन संरक्षण अपील की प्रभावीता पर सवाल उठाए हैं।

मध्य प्रदेश में ईंधन संरक्षण अपील के बीच बड़ा राजनीतिक विवाद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेट्रोल-डीजल की बचत और ईंधन संरक्षण की अपील के बीच मध्य प्रदेश में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मध्य प्रदेश के धर्म, संस्कृति, अध्यात्म एवं पर्यटन मंत्री तथा खंडवा जिले के प्रभारी मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी 15 से अधिक वाहनों के विशाल काफिले के साथ घूमते नजर आए। 

भारी पुलिस बल मौके पर पहुंच गया

इस घटना ने विपक्षी कांग्रेस को हमला बोलने का मौका दे दिया।कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष दीपक मुल्लू राठौड़ समेत अन्य कार्यकर्ता मंत्री के काफिले को रोकने के लिए पहुंचे। उन्होंने चेतावनी दी कि प्रधानमंत्री की अपील का पालन नहीं हो रहा है। विवाद बढ़ता देख 3 थानों के टीआई सहित भारी पुलिस बल मौके पर पहुंच गया।

अपील पर चर्चा

पुलिस और कांग्रेस नेताओं के बीच तीखी बहस हुई। दीपक मुल्लू राठौड़ इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाते हुए आगे बढ़े तो पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर कोतवाली थाने पहुंचा दिया।हिरासत में लिए जाने के बाद राठौड़ ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “मंत्री से मिलने तक नहीं दिया जा रहा। हम प्रधानमंत्री मोदी की पेट्रोल-डीजल बचत वाली अपील पर चर्चा करना चाहते थे।” 

संख्या कम की जाए

उन्होंने आगे चेतावनी दी कि आने वाले दिनों में भाजपा के सांसदों, मंत्रियों, विधायकों और महापौरों के काफिलों को रोका जाएगा और उनसे साइकिल से यात्रा करने की मांग की जाएगी।मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने सफाई देते हुए कहा कि काफिले में वाहनों की अधिक संख्या देखते ही उन्होंने कलेक्टर को निर्देश दे दिए हैं कि संख्या कम की जाए। 

क्रियान्वयन के बीच की खाई को उजागर करती

उन्होंने जिले के शासकीय अधिकारियों के साथ बैठक कर पेट्रोल-डीजल खपत कम करने के निर्देश देने की बात कही। साथ ही जनता से अपील की कि यदि कई लोग एक ही दिशा में जा रहे हों तो शेयरिंग वाहन का उपयोग करें।मंत्री ने कांग्रेस पर भी तंज कसा, “जनता अब कांग्रेस को गंभीरता से नहीं लेती और हम भी उन्हें गंभीरता से नहीं लेते।”यह घटना प्रधानमंत्री की अपील और व्यावहारिक क्रियान्वयन के बीच की खाई को उजागर करती है। 

विपक्ष इसे जनता के मुद्दों पर सियासी नाटक बता रहा है, जबकि सत्ताधारी पक्ष इसे सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था बता रहा है। खंडवा की यह घटना ईंधन संरक्षण की अपील को लेकर राजनीतिक बवाल का नया उदाहरण बन गई है, जो आने वाले समय में और विवादों को जन्म दे सकती है।

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