पंजाब में धान की कटाई का सीजन शुरू होने से पहले पराली प्रबंधन को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने किसानों के पक्ष में बड़ा बयान दिया है। 19 सितंबर 2026 को पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के किसान मेले में बोलते हुए मान ने कहा कि वह पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ FIR दर्ज करने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने केंद्र से पराली प्रबंधन के लिए किसानों को आर्थिक प्रोत्साहन देने की मांग की।
पराली न जलाने पर नकद प्रोत्साहन की मांग
भगवंत मान ने कहा कि केवल FIR या निगरानी के जरिए पराली जलाने की समस्या का समाधान नहीं होगा। उनके मुताबिक, किसानों को आर्थिक सहायता देकर पराली के प्रबंधन के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। किसान संगठनों की ओर से पराली प्रबंधन के लिए 3,000 रुपये प्रति एकड़ तक के प्रोत्साहन की मांग की जा रही है। हालांकि, इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार मान ने अपने संबोधन में करीब 1,500 रुपये प्रति एकड़ के प्रोत्साहन की बात कही थी।
बोले- किसान खुद भी पराली नहीं जलाना चाहते
मान ने कहा कि किसान भी पराली जलाने से होने वाले धुएं और उसके असर से प्रभावित होते हैं। उन्होंने पंजाब से होने वाले धान उत्पादन और उससे निकलने वाली पराली के प्रबंधन की लागत पर ध्यान देने की जरूरत बताई। उन्होंने दिल्ली-NCR के प्रदूषण के लिए केवल पंजाब के किसानों को जिम्मेदार ठहराने पर भी सवाल उठाया और कहा कि प्रदूषण के स्रोतों को व्यापक रूप से देखा जाना चाहिए।
पंजाब में पराली जलाने के मामले लगातार घटे
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में पिछले कुछ वर्षों में बड़ी कमी आई है। 2023 में 36,663 फायर काउंट दर्ज हुए थे, जो 2024 में घटकर 10,909 और 2025 में 5,114 रह गए। यानी 2023 से 2025 के बीच करीब 86% की कमी दर्ज की गई। सरकार के अनुसार इस कमी में फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी की उपलब्धता, राज्य और जिला स्तर की योजनाओं तथा कार्रवाई की भूमिका रही है।
FIR, जुर्माने और 'रेड एंट्री' को लेकर विवाद
पराली जलाने के मामलों में कार्रवाई को लेकर पंजाब और केंद्र के बीच नीति पर बहस जारी है। केंद्र की ओर से सितंबर 2026 में जारी ड्राफ्ट नियमों में जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में 'रेड एंट्री' से जुड़ा प्रावधान भी प्रस्तावित किया गया है। किसान संगठनों का कहना है कि ऐसी कार्रवाई से किसानों को ऋण और अन्य प्रक्रियाओं में परेशानी हो सकती है। वहीं, मान ने कहा कि उनका जोर कार्रवाई के बजाय ऐसे आर्थिक मॉडल पर है, जिससे किसान पराली जलाए बिना उसका प्रबंधन कर सकें।
मशीनों पर सब्सिडी से पराली प्रबंधन
पंजाब में पराली प्रबंधन के लिए कृषि मशीनरी को बढ़ावा दिया जा रहा है। किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए अलग-अलग मशीनें सब्सिडी पर उपलब्ध कराई जाती हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार 2025 में पंजाब में क्रॉप रेजिड्यू मैनेजमेंट मशीनरी के लिए 395 करोड़ रुपये खर्च किए गए और 5,358 लाभार्थियों को 50 से 80% तक की सब्सिडी दी गई। इसमें व्यक्तिगत किसान, पंचायतें और अन्य संस्थाएं शामिल थीं। पराली जलाने की घटनाओं में लगातार कमी के बावजूद धान कटाई के नए सीजन में इसे नियंत्रित करना पंजाब, हरियाणा और दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण प्रबंधन के लिए अहम मुद्दा बना हुआ है।