Haridwar Bilva Parvat: हरिद्वार के बिल्व पर्वत पर दुर्लभ 13 मुखी बेलपत्र, शिव को...

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Haridwar Bilva Parvat: हरिद्वार के बिल्व पर्वत पर दुर्लभ 13 मुखी बेलपत्र, शिव को प्रिय, औषधीय चमत्कार

haridwar bilva parvat हरिद्वार के बिल्व पर्वत पर दुर्लभ 13 मुखी बेलपत्र शिव को प्रिय औषधीय चमत्कार

बिल्व पर्वत का 13 मुखी बेलपत्र… शिव का प्रिय प्रसाद

Haridwar Bilva Parvat: सावन माह में हरिद्वार के बिल्व पर्वत पर पाया जाने वाला 13 मुखी बेलपत्र अपनी दुर्लभता और आध्यात्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। भगवान शिव को अति प्रिय यह बेलपत्र न केवल पूजा में चढ़ाया जाता है… बल्कि इसके औषधीय गुण इसे संजीवनी की तरह खास बनाते हैं। हरिद्वार के बिल्केश्वर मंदिर के आसपास यह पवित्र पौधा भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र है... जो सावन में शिव भक्ति को और गहरा करता है।

औषधीय खजाना… बेलपत्र के चमत्कारी गुण

गुरु कृपा औषधालय के वैध एम.आर. शर्मा के अनुसार, 13 मुखी बेलपत्र केवल धार्मिक महत्व तक सीमित नहीं है, बल्कि यह औषधीय गुणों का भंडार है। बेल के पत्ते, छाल जड़ और फल विभिन्न गंभीर बीमारियों में लाभकारी हैं। यह शरीर को रोगों से मुक्त करने और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में प्रभावी माना जाता है जिससे इसे आयुर्वेद में विशेष स्थान प्राप्त है। Haridwar Bilva Parvat: read more: हरिद्वार में डीएम और एसएसपी ने कांवड़ियों पर बरसाए फूल

पौराणिक महत्व… माता पार्वती की तपस्थली

बिल्केश्वर मंदिर के व्यवस्थापक सतीश वन महाराज बताते हैं कि बिल्व पर्वत वही पवित्र स्थल है, जहां माता पार्वती ने हजारों वर्षों तक तपस्या कर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था। इस दौरान उन्होंने केवल बेलपत्र और जल का सेवन किया। यह स्थान शिव भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र है और यहां की 13 मुखी बेलपत्र को विशेष रूप से पूजनीय माना जाता है।

समुद्र मंथन और बेलपत्र का चमत्कार

Haridwar Bilva Parvat: सतीश वन महाराज के अनुसार… समुद्र मंथन के दौरान जब भगवान शिव ने हलाहल विष का पान किया, तो बिल्व पर्वत के बेलपत्र का रस ही उनके लिए संजीवनी बना। इस रस ने विष के प्रभाव को शांत किया जिससे बेलपत्र का महत्व और बढ़ गया। आज भी यह दुर्लभ 13 मुखी बेलपत्र केवल उत्तराखंड के बिल्व पर्वत पर ही पाया जाता है जो इसे और भी विशेष बनाता है।

भक्तों और औषधीय उपयोग में बेलपत्र की मांग

Haridwar Bilva Parvat: सावन माह में बिल्व पर्वत पर बेलपत्र की मांग बढ़ जाती है.. क्योंकि भक्त इसे शिव पूजा में चढ़ाते हैं। साथ ही, आयुर्वेदिक चिकित्सक भी इसके औषधीय गुणों के कारण इसे उपयोग में लाते हैं। बिल्केश्वर मंदिर के आसपास यह पवित्र पौधा भक्तों और पर्यटकों के लिए आध्यात्मिक और औषधीय महत्व का प्रतीक बन चुका है, जो हरिद्वार की सांस्कृतिक धरोहर को और समृद्ध करता है। read more:  हरिद्वार में डीएम और एसएसपी ने कांवड़ियों पर बरसाए फूल    

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