नोएडा की 31 वर्षीय ट्विशा शर्मा की भोपाल में हुई संदिग्ध मौत के मामले में जांच लगातार आगे बढ़ रही है। एक तरफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर दोनों पक्षों के बीच अदालत में भी कानूनी लड़ाई जारी है। मंगलवार को भोपाल जिला अदालत में कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने से संबंधित आवेदनों पर सुनवाई हुई।
रिवार ने उठाए गंभीर सवाल
ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा और भाई हर्षित शर्मा ने अदालत में आवेदन देकर कॉल डिटेल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग की थी। परिवार का आरोप है कि 12 मई को जब ट्विशा घर में बेदम पड़ी थी, उसी दौरान उसकी सास और पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह लगातार कई लोगों से फोन पर बातचीत कर रही थीं। परिजनों का मानना है कि कॉल रिकॉर्ड से घटना से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
पुलिस ने मांगे कॉल रिकॉर्ड
सुनवाई के दौरान पुलिस ने अदालत को बताया कि पूर्व जज गिरिबाला सिंह के 12 मई से 20 मई तक के कॉल डिटेल रिकॉर्ड संबंधित टेलीकॉम कंपनियों से मांगे गए हैं। इन रिकॉर्ड्स को जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। साथ ही घटना से जुड़े मोबाइल नंबरों की टावर लोकेशन सुरक्षित रखने के लिए भी कंपनियों को निर्देश भेजे गए हैं।
मौत के बाद 46 नंबरों पर कॉल का दावा
ट्विशा के परिजनों का दावा है कि उनकी मौत के बाद गिरिबाला सिंह ने 46 अलग-अलग नंबरों पर कॉल किए थे। इसी वजह से परिवार कॉल रिकॉर्ड की गहन जांच की मांग कर रहा है। अदालत में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया है।
CBI ने संभाली जांच
दिसंबर 2025 में अधिवक्ता समर्थ सिंह से विवाह करने वाली ट्विशा 12 मई की रात कटारा हिल्स स्थित घर में फंदे पर लटकी मिली थीं। मायके पक्ष ने दहेज प्रताड़ना और हत्या का आरोप लगाया है, जबकि ससुराल पक्ष इसे आत्महत्या बता रहा है। राज्य सरकार की सिफारिश के बाद CBI ने जांच अपने हाथ में ले ली है। भोपाल पुलिस और CBI के बीच समन्वय के लिए डीसीपी विकास सहवाल को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।