‘बदले की भावना से नहीं बनते कानून’: हाईकोर्ट ने लगायी सुक्खू सरकार को फटकार, बाग...

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‘बदले की भावना से नहीं बनते कानून’: हाईकोर्ट ने लगायी सुक्खू सरकार को फटकार, बागी विधायकों की पेंशन बहाल करने का आदेश

‘बदले की भावना से नहीं बनते कानून’ हाईकोर्ट ने लगायी सुक्खू सरकार को फटकार बागी विधायकों की पेंशन बहाल करने का आदेश

Himachal news: हिमाचल प्रदेश में सियासी घमासान के बीच हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा है कि 2024 के राज्यसभा चुनाव के दौरान बागी हुए विधायकों की पेंशन तुरंत बहाल की जाए। न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस रंजन शर्मा की खंडपीठ ने 7 अप्रैल को सुनाए फैसले में सरकार को एक महीने के भीतर पेंशन और बकाया राशि जारी करने का आदेश दिया। साथ ही चेतावनी दी कि देरी होने पर 6% सालाना ब्याज के साथ भुगतान करना होगा। [caption id="attachment_146411" align="alignnone" width="1200"]Representative image Representative image[/caption]

‘पुराने मामलों पर लागू नहीं होगा नया कानून’

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि विधानसभा द्वारा लाया गया संशोधन कानून पुराने मामलों पर लागू नहीं किया जा सकता। अदालत ने टिप्पणी की कि कानून भविष्य के लिए बनाए जाते हैं, न कि किसी विशेष व्यक्ति को निशाना बनाने के लिए।

यह टिप्पणी सीधे तौर पर सरकार के उस फैसले पर सवाल खड़े करती है, जिसमें बागी विधायकों की पेंशन रोकने की कोशिश की गई थी।

बीजेपी का पलटवार, कहा- “सरकार को मिला करारा जवाब”

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद बीजेपी ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी प्रवक्ता आशीष शर्मा ने इसे “ऐतिहासिक निर्णय” बताते हुए कहा कि इससे साबित हो गया है कि सुक्खू सरकार की राजनीति ‘समान दृष्टि’ नहीं, बल्कि ‘बदले की भावना’ पर आधारित है।

उन्होंने आरोप लगाया कि 2024 में लाया गया संशोधन बिल पूरी तरह राजनीतिक द्वेष से प्रेरित था, जिसे बाद में सरकार को वापस लेना पड़ा। इसके बाद 2026 में नया संशोधन लाया गया, जो केवल भविष्य के विधायकों पर लागू किया गया।

[caption id="attachment_138865" align="alignnone" width="1200"]हिमाचल CM सुक्खू हिमाचल CM सुक्खू[/caption]

दो साल तक परेशान किए गए पूर्व विधायक: बीजेपी

बीजेपी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने पूर्व विधायकों को दो साल तक मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान किया। उनकी वैध पेंशन रोकी गई और उन्हें न्याय के लिए बार-बार अदालत का रुख करना पड़ा।

पार्टी का कहना है कि एंटी-डिफेक्शन कानून (दसवीं अनुसूची) का दुरुपयोग कर पेंशन रोकने की कोशिश की गई, जबकि यह प्रावधान केवल सदस्यता समाप्ति तक सीमित है।

‘संविधान और लोकतंत्र की जीत’

बीजेपी ने इस फैसले को संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत करार दिया है। आशीष शर्मा ने कहा कि सरकार ने कानून का दुरुपयोग कर विपक्ष को दबाने की कोशिश की, लेकिन कोर्ट ने सच्चाई सामने ला दी।

उन्होंने कहा कि पार्टी इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाएगी और बताएगी कि कैसे कानून के जरिए राजनीतिक बदले की भावना को अंजाम देने की कोशिश की गई।

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