भागीरथपुरा में 29वीं मौत, कोर्ट सख्त, रिपोर्ट को 'आई-वॉश' करार दिया

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भागीरथपुरा में 29वीं मौत, कोर्ट सख्त, रिपोर्ट को 'आई-वॉश' करार दिया

भागीरथपुरा में 29वीं मौत कोर्ट सख्त रिपोर्ट को आई-वॉश करार दिया

Bhagirathpura Water Contamination Death: देश के सबसे स्वच्छ शहर और मध्यप्रदेश के आर्थिक नगर इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी कांड को अब एक माह बीत चुका है, लेकिन अब भी मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीते मंगलवार को यहां 62 साल के पहलवान खूबचंद बंधोनिया की भी मौत हो गई। इसी के साथ मरने वालों का आंकड़ा 29 पहुंच गया है। 

29वीं मौत

खूबचंद को उल्टी-दस्त की शिकायत के चलते बीते कई दिनों से अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने उनके मौत के कारणों की पुष्टि नहीं की, लेकिन परिजनों का दावा है कि, खूबचंद की मौत दूषित पानी की वजह से ही हुई। बुधवार को परिजनों ने अंतिम संस्कार से पहले सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन किया। वहीं अब भर्ती मरीजों की संख्या सिर्फ 6 रह गई हैं। इनमें से 3 ICU में हैं, और एक वेंटिलेटर पर है। [caption id="attachment_130947" align="alignnone" width="513"]खूबचंद बंधोनिया की मौत खूबचंद बंधोनिया की मौत[/caption]

कोर्ट सख्त, रिपोर्ट को 'आई-वॉश' करार 

दूसरी ओर, इसी मामले को लेकर हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में 27 फरवरी को सुनवाई हुई। हाईकोर्ट में ढाई घंटे से ज्यादा सुनवाई चली। इस दौरान 23 मौतों की रिपोर्ट पेश की गई। जिसमें से 16 मौतें दूषित पानी से, जबकि 4 को लेकर असमंजस, वहीं, 3 की मौत दूषित पानी से नहीं मानी है। सुनवाई के बाद कोर्ट ने रिपोर्ट को अस्पष्ट बताते हुए उसे मात्र एक 'आई-वॉश' करार दिया है। https://youtube.com/shorts/PMqAlr16x7c?si=-Gep7Lwk-UMD134f सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए स्वतंत्र जांच के आदेश दिए। हाईकोर्ट ने कहा कि स्वच्छ पेयजल का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का भाग है। यह मामला गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति से जुड़ा हुआ है। [caption id="attachment_130946" align="alignnone" width="507"]हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में 27 फरवरी को सुनवाई हुई हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में 27 फरवरी को सुनवाई हुई[/caption]

Bhagirathpura Water Contamination Death: रिपोर्ट पर सवाल 

हाईकोर्ट  ने राज्य सरकार और नगर निगम की पेश रिपोर्ट पर सवाल उठाए, और कहा कि जमीनी स्तर पर साफ पानी की आपूर्ति, इलाज और जांच संबंधी निर्देशों का पूरा पालन नहीं किया गया है। मौतों के आंकड़ों को लेकर भी गंभीर असहमति है। जहां सरकारी रिपोर्ट में 16 मौतों को दुषित पानी से जोड़ा गया है, वहीं याचिकाकर्ताओं ने मृतकों की संख्या लगभग 29 बताई। बता दे कि कोर्ट ने दैनिक जल गुणवत्ता जांच और नियमित स्वास्थ्य शिविर जारी रखने के निर्देश दिए और 4 सप्ताह में अंतरिम रिपोर्ट मांगी। अगली सुनवाई 5 मार्च 2026 को होगी।

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