हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पंजाब में नशे की समस्या को लेकर चिंता जताई है। सोमवार को पंजाब के फाजिल्का जिले के अरनीवाला में आयोजित नशा मुक्ति यात्रा के चौथे चरण के कार्यक्रम में पहुंचे सीएम सैनी ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई किसी एक राजनीतिक दल की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह युवाओं का भविष्य बचाने का अभियान है। उन्होंने लोगों से अपील की कि नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को जनभागीदारी के साथ मजबूत किया जाए।
4 हजार किलोमीटर की यात्रा, 117 विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने बताया कि 18 सितंबर से शुरू हुई नशा मुक्ति यात्रा 30 सितंबर तक चलेगी। इस दौरान करीब 4 हजार किलोमीटर की दूरी तय करते हुए पंजाब के सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। सैनी ने कहा कि नशे के खिलाफ जागरूकता को केवल सरकारी प्रयासों तक सीमित नहीं रखना चाहिए। समाज के हर वर्ग को युवाओं को नशे से दूर रखने में सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
पंजाब सरकार पर वादे पूरे नहीं करने का आरोप
नायब सैनी ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान छह महीने में नशा खत्म करने का वादा किया गया था, लेकिन सरकार के कार्यकाल के अंतिम दौर में भी समस्या गंभीर बनी हुई है। उन्होंने युवाओं को रोजगार देने के वादों को लेकर भी सवाल उठाए। सैनी ने बताया कि पंजाब के कुछ उद्योगपतियों ने हरियाणा में उद्योग लगाने की इच्छा जताई थी, लेकिन उन्होंने उन्हें पंजाब में ही निवेश करने की सलाह दी, ताकि स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल सके।
उपचार, रोजगार और खेलों से जोड़ने पर जोर
सीएम सैनी ने कहा कि नशे की समस्या का समाधान केवल पुलिस कार्रवाई से नहीं हो सकता। इसके लिए नशा मुक्ति, उपचार और पुनर्वास के साथ युवाओं को शिक्षा, रोजगार और खेलों से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने हरियाणा में नशा मुक्ति केंद्रों के जरिए मुफ्त उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने और युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने के प्रयासों का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई को कानून-व्यवस्था के साथ युवाओं के भविष्य से जोड़कर देखना होगा। शिक्षा, रोजगार और विकास के अवसर बढ़ाकर ही नशामुक्त समाज की मजबूत नींव तैयार की जा सकती है।