क्या धान खरीदी केंद्र में हो रही गड़बड़ी ?

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क्या धान खरीदी केंद्र में हो रही गड़बड़ी ?

क्या धान खरीदी केंद्र में हो रही गड़बड़ी

धान खरीदी केंद्र अनियमितता: सेवा सहकारी समिति शिवराजपुर के धान खरीदी केंद्र में चल रही अनियमितताओं की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए तहसीलदार ने औचक निरीक्षण किया. उनके साथ थाना प्रभारी सिंहपुर अजय अहिरवार भी मौजूद रहे. निरीक्षण के दौरान जो तथ्य सामने आए... वो न सिर्फ चौंकाने वाले थे, बल्कि किसानों के साथ खुलेआम हो रही धोखाधड़ी की पोल खोल दी.

धान खरीदी केंद्र अनियमितता: क्या धान गायब हो रहा ?

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने सबसे पहले किसानों की तौल प्रक्रिया का जायजा लिया. किसानों से खरीदी जा रही धान की तौल जब कराई गई तो वजन 41 किलो 200 ग्राम पाया गया, जबकि नियमानुसार एक बोरी का मानक वजन 40 किलो 600 ग्राम होना चाहिए. वहीं जब उसी धान से भरी और सिली हुई बोरियों की तौल कराई गई तो वजन रहस्यमय तरीके से घटकर मात्र 36 किलो रह गया. इस तरह करीब 5 किलो धान का अंतर सामने आया, जिसने पूरे खरीदी तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए. अधिकारियों के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यही रहा कि आखिर यह 5 किलो धान कहां गायब हो गया. Also Read-पति से कराया तलाक, 5 साल तक इमरान ने सोनू बनकर किया रेप

धान खरीदी केंद्र अनियमितता: धान की बोरियों को खुले में रखा जा रहा

निरीक्षण में यह भी सामने आया कि खरीदी केंद्र में तौल के बाद धान की बोरियों को खुले में रखा जा रहा है. खुले में रखे जाने के कारण धान में नमी का स्तर बढ़कर 19 पॉइंट तक पहुंच गया, जबकि शासन द्वारा निर्धारित मानक नमी स्तर 17 पॉइंट है. अधिक नमी होने से न सिर्फ धान की गुणवत्ता प्रभावित होती है, बल्कि बाद में किसानों को भुगतान में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है. Also Read-CM मोहन यादव के कार्यक्रम में हंगामा करने वाला युवक निकला वांटड आरोपी

अधिकारियों के आने से पहले गायब हो गए प्रबंधक

निरीक्षण के समय समिति के सहायक प्रबंधक हरिराम पांडेय मौके पर उपस्थित नहीं पाए गए. उनकी अनुपस्थिति को भी अधिकारियों ने गंभीरता से लिया. तहसीलदार प्रज्ञा दुबे ने पूरे मामले में पंचनामा तैयार कर आवश्यक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए.

किसानों ने क्या कुछ कहा

स्थानीय किसानों का आरोप है कि समिति द्वारा पहले तौल के समय किसानों से अधिक वजन लिया जाता है और बाद में मजदूरों के माध्यम से बोरियों से अतिरिक्त धान निकाल लिया जाता है. इस तरीके से समिति को अवैध मुनाफा होता है, जबकि किसान नुकसान झेलने को मजबूर होते हैं.

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