मध्य प्रदेश के रीवा स्थित पाठ्यपुस्तक निगम डिपो से करीब 40 लाख रुपये मूल्य की किताबें गायब होने का मामला सामने आया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, डिपो से कुल 495 बंडल किताबें लापता पाई गई हैं। यह किताबें बाजार में बिक्री के लिए रखी गई थीं। मामले की सूचना मिलते ही निगम और पुलिस प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।
495 बंडल किताबों का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला
जानकारी के मुताबिक, डिपो में कार्यरत कर्मचारियों श्यामलाल साकेत और धीरेंद्र मिश्रा ने 15 अप्रैल को स्टॉक में गड़बड़ी की जानकारी डिपो प्रभारी प्रवेश तिवारी को दी थी। कर्मचारियों ने बताया कि व्यापारियों को बिक्री के लिए रखी गई पुस्तकों के कई बंडल गोदाम से गायब हैं। इसके बाद स्टॉक का मिलान किया गया, जिसमें 495 बंडल किताबों का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।
रीवा के चोरहटा थाने में दर्ज
डिपो प्रभारी ने मामले की शिकायत रीवा के चोरहटा थाने में दर्ज कराई है। शिकायत की प्रतियां पाठ्यपुस्तक निगम के वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजी गई हैं। बताया गया है कि जिस गोदाम में किताबें रखी गई थीं, उसे किराए पर लिया गया है और वहां दो अलग-अलग हिस्सों में पुस्तकें संग्रहित की जाती हैं।
अंदरूनी मिलीभगत की आशंका भी जताई
जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि गोदाम में निःशुल्क वितरण और बाजार में बिक्री के लिए रखी जाने वाली दोनों प्रकार की किताबें मौजूद थीं, लेकिन केवल बिक्री वाली किताबें ही गायब हुई हैं। निःशुल्क वितरण की पुस्तकों को किसी ने हाथ तक नहीं लगाया। इससे मामले में अंदरूनी मिलीभगत की आशंका भी जताई जा रही है।
फिलहाल किताबों के बंडलों की गिनती और स्टॉक सत्यापन का कार्य जारी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने और अंतिम रिपोर्ट सामने आने के बाद दोषियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। यह मामला अब पूरे शिक्षा विभाग और पाठ्यपुस्तक निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।