पंजाब सरकार की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ राज्य के लाखों परिवारों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा का मजबूत आधार बनकर उभरी है। विशेष रूप से हाई-रिस्क गर्भावस्था, सिजेरियन डिलीवरी और गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं के इलाज में यह योजना बड़ी राहत प्रदान कर रही है। इसके तहत पात्र परिवारों को कैशलेस उपचार की सुविधा दी जाती है, जिससे आर्थिक बोझ काफी कम हो जाता है।
देश में लगभग हर दूसरी गर्भावस्था हाई-रिस्क श्रेणी में आती
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के अनुसार देश में लगभग हर दूसरी गर्भावस्था हाई-रिस्क श्रेणी में आती है। एनीमिया, कम उम्र में गर्भधारण, पूर्व सिजेरियन डिलीवरी, स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं और गरीबी जैसे कारण मां और शिशु दोनों के लिए खतरा बढ़ाते हैं। ऐसे मामलों में मुख्यमंत्री सेहत योजना प्रभावी सहायता प्रदान कर रही है।
देखभाल से जुड़े 7,300 मामलों का उपचार किया
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के आंकड़ों के मुताबिक 25 मई 2026 तक योजना के तहत मातृत्व और नवजात देखभाल से जुड़े 7,300 मामलों का उपचार किया गया है। इन पर करीब 7.04 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। इनमें 5,300 हाई-रिस्क सिजेरियन डिलीवरी के मामले शामिल हैं, जिन पर 6.37 करोड़ रुपए व्यय किए गए।
पटियाला की दीपिका और दीक्षा सोनकर जैसी कई महिलाओं ने इस योजना का लाभ उठाया है। दोनों का सिजेरियन ऑपरेशन और नवजात देखभाल पूरी तरह कैशलेस रही, जिससे परिवारों को आर्थिक चिंता से मुक्ति मिली।
2,094 नवजातों का विभिन्न चिकित्सा पैकेजों के तहत इलाज किया
योजना नवजात शिशुओं के लिए भी विशेष सहायता प्रदान कर रही है। अब तक 2,094 नवजातों का विभिन्न चिकित्सा पैकेजों के तहत इलाज किया जा चुका है। इनमें स्पेशल, एडवांस्ड और क्रिटिकल नियोनेटल केयर जैसी सेवाएं शामिल हैं। गंभीर संक्रमण, समय से पहले जन्म और वेंटिलेटर सहायता की जरूरत वाले नवजातों को भी उपचार उपलब्ध कराया गया है।
करीब 44.8 लाख पंजीकरणों के साथ मुख्यमंत्री सेहत योजना पंजाब में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती दे रही है और जरूरतमंद परिवारों के लिए एक भरोसेमंद स्वास्थ्य सुरक्षा कवच बनकर सामने आई है।