गुप्त नवरात्र 2026: महासप्तमी

गुप्त नवरात्र 2026: महासप्तमी पर मां कालरात्रि की पूजा से दूर होते हैं भय, शत्रु और शनि दोष

2026 गुप्त नवरात्र में महासप्तमी के दिन मां कालरात्रि की पूजा से भय, शत्रु और शनि दोष से मुक्ति मिलती है।

गुप्त नवरात्र 2026: महासप्तमी पर मां कालरात्रि की पूजा से दूर होते हैं भय, शत्रु और शनि दोष

गुप्त नवरात्र के सातवें दिन महासप्तमी मनाई जाती है। इस दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि मां कालरात्रि अपने भक्तों को हर प्रकार के भय, संकट और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा प्रदान करती हैं। कालरात्रि वह शक्ति हैं जो स्वयं काल का भी दमन करने में सक्षम हैं। उनकी उपासना करने से शत्रुओं पर विजय, सौभाग्य और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मां कालरात्रि को मां चामुंडा के नाम से भी पूजा जाता है।

महादुष्टों का विनाश करती है देवी

दुर्गा सप्तशती के अनुसार, मां कालरात्रि ने शुंभ, निशुंभ और रक्तबीज जैसे महादैत्यों के संहार के लिए यह उग्र रूप धारण किया था। यही कारण है कि उन्हें दुष्ट शक्तियों के विनाश की देवी माना जाता है। तीन नेत्रों वाली मां कालरात्रि की आराधना करने से भय, रोग, अकाल मृत्यु, भूत-प्रेत बाधा और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलने की मान्यता है।

आध्यात्मिक दृष्टि से महासप्तमी के दिन सहस्रार चक्र के जागृत होने का भी विशेष महत्व बताया गया है। यह चक्र मस्तक के शीर्ष पर स्थित माना जाता है और शुद्ध चेतना, आत्मज्ञान तथा आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक है। इसका संबंध बैंगनी रंग और आंतरिक बुद्धि से जोड़ा जाता है।

पूजा करने वाले पुजारियों के अनुसार

मां कालरात्रि की सवारी गर्दभ (गधा) है। उनके हाथों में खड़ग, वज्र और अन्य दिव्य अस्त्र-शस्त्र सुशोभित रहते हैं। मां को नील कमल अत्यंत प्रिय है, इसलिए पूजा में नील कमल अर्पित करना शुभ माना जाता है। वहीं, गुड़ और उड़द से बने व्यंजनों का भोग लगाने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। जिन लोगों पर शनि की महादशा या साढ़ेसाती का प्रभाव है, उन्हें इस दिन मां कालरात्रि की विशेष पूजा करने की सलाह दी जाती है।

सहस्रार चक्र होता है जागृत

सहस्रार चक्र आमतौर पर शुद्ध चेतना का चक्र माना जाता है. यह मस्तक के ठीक बीच में ऊपर की ओर स्थित होता है. इसका प्रतीक कमल की एक हजार पंखुड़ियां हैं. यह सिर के शीर्ष पर अवस्थित होता है. सहस्रार बैंगनी रंग का प्रतिनिधित्व करती है और यह आतंरिक बुद्धि और दैहिक मृत्यु से जुड़ी होती है.

पूजन मंत्र

"या देवी सर्वभूतेषु कालरात्रि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥"

संबंधित सामग्री

मैहर में हो रहा मां शारदा लोक का निर्माण, सीएम डॉ. मोहन बोले- धार्मिक तीर्थाटन बढ़ेगा, मिलेगा रोजागार

मैहर में हो रहा मां शारदा लोक का निर्माण, सीएम डॉ. मोहन बोले- धार्मिक तीर्थाटन बढ़ेगा, मिलेगा रोजागार

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मैहर के मां शारदा मंदिर में पूजा कर प्रदेशवासियों की समृद्धि की कामना की और मंदिर की व्यवस्था का अवलोकन किया।

सावन माह में कब है मासिक दुर्गाष्टमी व्रत? नोट कर लें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और देवी मां की पूजा विधि

सावन माह में कब है मासिक दुर्गाष्टमी व्रत? नोट कर लें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और देवी मां की पूजा विधि

सावन मासिक दुर्गाष्टमी व्रत 2026 का आयोजन 19 अगस्त से 20 अगस्त तक होगा। इस दौरान विशेष पूजा विधि और मंत्रों के साथ मां दुर्गा की उपासना की जाएगी।

बारिश के लिए खूंखार मगरमच्छ की पूजा, तेलंगाना से सामने आया हैरान कर देने वाला वीडियो

बारिश के लिए खूंखार मगरमच्छ की पूजा, तेलंगाना से सामने आया हैरान कर देने वाला वीडियो

तेलंगाना के गडवाल जिले में पुजारी ने कृष्णा नदी के किनारे एक मगरमच्छ की पूजा की, जिसे वरुण देव का वाहन माना जाता है। वीडियो वायरल हो गया।

सावन शिवरात्रि पर करें ये सरल उपाय, शिव-पार्वती का मिलेगा आशीर्वाद

सावन शिवरात्रि पर करें ये सरल उपाय, शिव-पार्वती का मिलेगा आशीर्वाद

सावन शिवरात्रि के दिन विशेष पूजा और उपाय से भाग्य और आशीर्वाद की प्राप्ति होती है। इस दिन विशेष मुहूर्त में शिव जी की पूजा की जाती है।

कब है सावन की पहली कामिका एकादशी? नोट करें सही तारीख और मुहूर्त

कब है सावन की पहली कामिका एकादशी? नोट करें सही तारीख और मुहूर्त

कामिका एकादशी व्रत, 2026 में 9 अगस्त को, भगवान विष्णु की पूजा से साधकों को अक्षय पुण्य और पापों से मुक्ति की प्राप्ति होती है।

Advertisement

Uk Add यूसीसी-समानता द्वारा समरसता 01 on 23 Aug 2026