रैपर और सिंगर यो यो हनी सिंह सोमवार को महाराष्ट्र साइबर पुलिस के सामने पेश नहीं हुए। उन्हें दिल्ली में हुए एक कॉन्सर्ट के दौरान कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में पूछताछ के लिए समन भेजा गया था। पुलिस के मुताबिक, हनी सिंह ने जांच अधिकारी के सामने पेश होने के लिए और समय मांगा है।
गिरफ्तारी वारंट के लिए कोर्ट जाएगी पुलिस
महाराष्ट्र साइबर पुलिस के अधिकारी ने बताया कि हनी सिंह समन के बावजूद पूछताछ के लिए नहीं पहुंचे। अब एजेंसी संबंधित अदालत से गिरफ्तारी वारंट मांगने की तैयारी कर रही है। साथ ही हनी सिंह के खिलाफ लुक-आउट सर्कुलर (LOC) जारी करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी, ताकि वह देश से बाहर न जा सकें।
कॉन्सर्ट के वीडियो से शुरू हुआ विवाद
यह मामला 1 मार्च 2025 को दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में हुए हनी सिंह के कॉन्सर्ट से जुड़े एक वीडियो का है। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसमें हनी सिंह पर कथित तौर पर अश्लील संदर्भ वाली टिप्पणी करने का आरोप लगा। इसके बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने आपत्ति जताई और शिकायत दर्ज कराई गई।
हनी सिंह ने वीडियो जारी कर मांगी थी माफी
विवाद बढ़ने के बाद हनी सिंह ने एक वीडियो जारी कर माफी मांगी थी। उन्होंने कहा था कि वीडियो क्लिप को इस तरह एडिट किया गया, जिससे लोगों को ठेस पहुंची। उन्होंने स्पष्ट किया था कि किसी को अपमानित या चोट पहुंचाने का उनका इरादा नहीं था।
हनी सिंह ने अपने बयान में कहा था कि उन्होंने एक गाइनेकोलॉजिस्ट से युवाओं में अनसेफ सेक्स के कारण बढ़ रहे सेक्सुअल इंफेक्शन को लेकर बातचीत की थी। उनका दावा था कि उन्होंने यह संदेश Gen Z को समझ आने वाली भाषा में देने की कोशिश की।
हिंदू शक्ति दल ने दायर की थी याचिका
इस मामले में हिंदू शक्ति दल की ओर से याचिका दायर की गई थी। संगठन ने आरोप लगाया था कि हनी सिंह और रैपर बादशाह का 2006 में रिलीज हुआ एक गाना आपत्तिजनक है और इसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बच्चों के लिए भी उपलब्ध कराया गया है।
मई में दिल्ली हाईकोर्ट ने इस याचिका के संबंध में हनी सिंह को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था।
कोर्ट ने गाने के URL हटाने का दिया था निर्देश
इससे पहले अप्रैल में दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को कथित गाने ‘वॉल्यूम 1’ के URL सोशल मीडिया और फाइल-शेयरिंग प्लेटफॉर्म से हटाने का निर्देश दिया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने कंटेंट को बेहद अश्लील, आपत्तिजनक और महिलाओं के प्रति अपमानजनक बताया था। अदालत ने कहा था कि ऐसे कंटेंट को सही ठहराने के लिए कलात्मक स्वतंत्रता या अभिव्यक्ति की आजादी का सहारा नहीं लिया जा सकता।