मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले से सरकारी विकास के दावों पर सवाल खड़े करती तस्वीर सामने आई है। मोहनगढ़ तहसील के रानीपुरा गांव में ग्रामीण लंबे समय से पक्के और सुरक्षित पुल की मांग कर रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं मिलने के बाद उन्होंने खुद ही एक अस्थायी पुल तैयार कर लिया। तालाब के भराव क्षेत्र में रास्ता नहीं होने के कारण ग्रामीणों ने आपस में चंदा जुटाया और प्लास्टिक के ड्रम, रस्सियों और बांस की मदद से पानी के ऊपर तैरने वाला पुल बना डाला। ग्रामीण इसे अपनी जरूरत का जुगाड़ बता रहे हैं, लेकिन यह व्यवस्था उनके लिए जोखिम से भरी हुई है। गांव से बाहर जाने के लिए सुरक्षित और आसान रास्ता उपलब्ध नहीं होने के कारण लोगों को इसी अस्थायी पुल का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। तस्वीरें सामने आने के बाद अब प्रशासनिक व्यवस्था और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
स्कूल और अस्पताल जाने का यही सहारा
रानीपुरा गांव के ग्रामीणों के लिए ड्रमों से बनाया गया यह पुल रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया है। गांव से बाहर जाने वाला पक्का रास्ता कई किलोमीटर लंबा और खराब स्थिति में बताया जा रहा है। बारिश के दौरान रास्ते पर कीचड़ होने से लोगों की परेशानी और बढ़ जाती है। ऐसे में स्कूली बच्चों को पढ़ाई के लिए गांव से बाहर जाने के लिए इसी अस्थायी पुल का सहारा लेना पड़ता है। किसी ग्रामीण के बीमार होने पर अस्पताल तक पहुंचने की चुनौती भी सामने रहती है। किसान खेतों और बाजार तक जाने के लिए भी इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। ड्रमों पर बनाया गया यह पुल पानी के ऊपर हिलता-डुलता रहता है, जिससे इसे पार करना आसान नहीं है। संतुलन बिगड़ने पर व्यक्ति के गहरे पानी में गिरने का खतरा बना रहता है। इसके बावजूद ग्रामीण अपनी मजबूरी में इस रास्ते का इस्तेमाल कर रहे हैं।
आवेदन देकर थके तो खुद बनाया पुल
ग्रामीणों का कहना है कि सुरक्षित पुल निर्माण की मांग को लेकर वे लंबे समय से जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के सामने अपनी समस्या रख रहे हैं। ग्रामीणों ने कई बार लिखित आवेदन भी दिए, लेकिन उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। लगातार गुहार लगाने के बाद जब उन्हें कोई ठोस मदद नहीं मिली तो ग्रामीणों ने खुद ही रास्ता निकालने का फैसला किया। उन्होंने आपस में चंदा एकत्र किया और उपलब्ध संसाधनों से ड्रमों को रस्सियों और बांस की मदद से जोड़कर पुलनुमा संरचना तैयार कर दी। यह व्यवस्था किसी सरकारी परियोजना का हिस्सा नहीं है, बल्कि ग्रामीणों की मजबूरी और आपसी सहयोग का परिणाम है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें सुरक्षित और स्थायी पुल चाहिए, ताकि बच्चों, बुजुर्गों, मरीजों और किसानों को हर दिन जान जोखिम में डालकर तालाब पार न करना पड़े।
हादसे का खतरा, फिर भी मजबूरी में इस्तेमाल
ड्रमों और रस्सियों से बना यह अस्थायी पुल ग्रामीणों के लिए सुविधा से ज्यादा जोखिम का कारण बन सकता है। पानी के ऊपर तैरते ड्रमों पर चलते समय संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों के लिए यह रास्ता बेहद मुश्किल हो सकता है। ग्रामीणों के सामने समस्या यह है कि अगर वे इस पुल का इस्तेमाल नहीं करते हैं तो उन्हें गांव से बाहर जाने के लिए लंबा और खराब रास्ता तय करना पड़ता है। बारिश और कीचड़ के कारण वह रास्ता भी परेशानी बढ़ाता है। ऐसे में लोग जोखिम जानते हुए भी ड्रमों से बने पुल का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर उन्हें सुरक्षित पुल की सुविधा कब मिलेगी। उनका कहना है कि प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय समय रहते स्थायी समाधान करना चाहिए।
जिला पंचायत CEO ने जल्द समाधान का भरोसा दिया
मामला सामने आने के बाद टीकमगढ़ जिला पंचायत के सीईओ ने इस समस्या को संज्ञान में लेने की बात कही है। उन्होंने स्वीकार किया कि रानीपुरा गांव के ग्रामीणों ने ड्रमों के ऊपर पुलनुमा आकृति तैयार की है और उसी के जरिए तालाब को पार कर रहे हैं। जिला पंचायत सीईओ ने कहा कि ग्रामीणों की इस गंभीर समस्या की जानकारी प्रशासन के संज्ञान में आ गई है और जल्द से जल्द समाधान कराने का प्रयास किया जाएगा। अब ग्रामीणों को प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अस्थायी और जोखिम भरे इस जुगाड़ को कब तक सुरक्षित और स्थायी पुल का विकल्प मिल पाएगा। फिलहाल ग्रामीणों की तस्वीरें सामने आने के बाद यह मामला सरकारी व्यवस्था के सामने एक गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है कि बुनियादी कनेक्टिविटी के लिए लोगों को आखिर कब तक खुद अपने स्तर पर जुगाड़ करना पड़ेगा।