संभावित अल नीनो प्रभाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र की सुरक्षा के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि देश और दुनिया के सामने अल नीनो की चुनौती मौजूद है, जिसका असर कृषि उत्पादन और मानसून पर पड़ सकता है। ऐसे में केंद्र सरकार किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पहले से रणनीति बनाकर काम कर रही है।
मंगलवार को कृषि मंत्रालय में आयोजित विशेष समीक्षा बैठक में केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को देश के सभी जिलों के लिए आकस्मिक (कंटिजेंसी) योजना तैयार रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता किसानों के हितों की रक्षा करना और संभावित संकट को अवसर में बदलना है।
समस्याओं का इंतजार नहीं करती सरकार: शिवराज
बैठक में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मोदी सरकार किसी समस्या के सामने आने का इंतजार नहीं करती, बल्कि पहले से तैयारी कर उसके प्रभाव को कम करने की दिशा में काम करती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिला स्तर पर तैयार की जा रही योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।
अल नीनो से मानसून और कृषि पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों के अनुसार अल नीनो की स्थिति बनने पर मानसूनी वर्षा प्रभावित हो सकती है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने भी अपने पूर्वानुमानों में संकेत दिया है कि अल नीनो के प्रभाव से कुछ क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज हो सकती है। इसका असर विशेष रूप से कृषि प्रधान राज्यों पर पड़ने की आशंका है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गुजरात, झारखंड तथा उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में वर्षा सामान्य से कम रहने या अनियमित होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसी स्थिति में खरीफ फसलों के उत्पादन पर प्रभाव पड़ सकता है।
किसानों के हितों की सुरक्षा पर जोर
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल संकट प्रबंधन नहीं, बल्कि किसानों को संभावित नुकसान से बचाने के लिए समय रहते आवश्यक कदम उठाना है। जिला स्तर पर तैयार की जा रही योजनाओं के माध्यम से फसल प्रबंधन, वैकल्पिक कृषि रणनीति, जल संरक्षण और आपदा प्रबंधन जैसे उपायों को प्राथमिकता दी जाएगी।
मध्य प्रदेश के लिए राहत भरी खबर
अल नीनो की आशंकाओं के बीच मध्य प्रदेश के लिए राहत भरी सूचना भी सामने आई है। मौसम विभाग के अनुसार अगले 72 घंटों के भीतर राज्य में दक्षिण-पश्चिम मानसून प्रवेश कर सकता है। सामान्य तौर पर मध्य प्रदेश में मानसून 15 जून के आसपास पहुंचता है, लेकिन इस बार इसकी प्रगति धीमी रही है। अब मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि राज्य में जल्द मानसूनी गतिविधियां तेज हो सकती हैं।