असम विधानसभा में 25 मई को हिमंत बिस्वा सरमा सरकार ने UCC बिल पेश किया है। कैबिनेट के हरी झंडी दिखाए जाने के बाद राज्य सरकार ने इसे सदन के पटल पर रखा। सरमा सरकार के इस बड़े कदम के बाद असम अब उत्तराखंड और गुजरात के बाद तीसरा ऐसा BJP शासित राज्य बन गया है, जहां UCC को लेकर कदम उठाए गए हैं।
27 मई को चर्चा
UCC को पटल पर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की ओर से राज्य के संसदीय कार्य मंत्री अतुल बोरा ने रखा। इस बिल को 2 हफ्ते पहले कैबिनेट से मंजूरी मिली थी। इस बिल पर 27 मई को चर्चा होगी। यदि बिल पारित हो जाता है, तो असम देश का तीसरा ऐसा राज्य बन जाएगा। इससे पहले उत्तराखंड और गुजरात UCC लागू कर चुके हैं।
इनपर मिलेगी छूट
CM सरमा के अनुसार, अनुसूचित जनजातियां (पहाड़ी) और अनुसूचित जनजातियां (मैदानी) UCC के दायरे से बाहर रहेंगी। साथ ही 'पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों, प्रथाओं और अनुष्ठानों' को भी इससे छूट मिलेगी। CM सरमा ने चुनाव के बाद सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में कहा था, 'यूनिफॉर्म सिविल कोड 4 विषयों को कवर करेगा। शादी की न्यूनतम उम्र, बहुविवाह पर रोक, माता-पिता की संपत्ति में बेटियों को भी समान अधिकार, और लिव-इन रिलेशन से जुड़े मामले।'