बांग्लादेश में चुनाव से पहले हिंसा का उबाल, मानवाधिकार रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

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बांग्लादेश में चुनाव से पहले हिंसा का उबाल, मानवाधिकार रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

बांग्लादेश में चुनाव से पहले हिंसा का उबाल मानवाधिकार रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

bangladesh election violence: बांग्लादेश में 13वें संसदीय चुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे देश में हिंसा और अराजकता की तस्वीर भी गहराती जा रही है. 12 फरवरी को होने वाले चुनाव से पहले जारी मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट ने हालात को बेहद चिंताजनक बताया है। राजनीतिक हत्याएं, झड़पें और खुलेआम हमले अब आम होते जा रहे हैं। चुनाव आयोग द्वारा 11 दिसंबर 2025 को चुनावी शेड्यूल घोषित किए जाने के कुछ ही घंटों बाद इंकलाब मंच के प्रवक्ता शरीफ उस्मान बिन हादी की ढाका में दिनदहाड़े हत्या ने माहौल को और भड़का दिया। इसके बाद से देशभर में चुनावी हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही।

bangladesh election violence: चुनावी शेड्यूल के बाद बढ़ी हिंसा

बांग्लादेशी मीडिया ढाका ट्रिब्यून ने सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया कि चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद से अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 500 से अधिक लोग घायल हुए हैं। राजनीतिक दलों के बीच टकराव अब सड़कों और बाजारों तक पहुंच गया है।

bangladesh election violence: निर्दलीय उम्मीदवार के समर्थक की हत्या

मैमनसिंह जिले के धोबौरा क्षेत्र में निर्दलीय उम्मीदवार सलमान उमर रुबेल के समर्थक नजरुल इस्लाम की भरे बाजार में हत्या कर दी गई। इसी तरह, जमात-ए-इस्लामी के सेक्रेटरी रेजाउल करीम की शेरपुर जिले में पीट-पीटकर जान ले ली गई। मानवाधिकार सांस्कृतिक फाउंडेशन (MSF) ने दिसंबर और जनवरी की तुलना करते हुए कहा है कि देश में लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति तेजी से बिगड़ी है। संगठन ने हालात को “अधिक हिंसक और अस्थिर” बताया है। Also Read-mumbai airport ground collision: दो विमानों के विंग्स टकराए: टला बड़ा हादसा

75 झड़पों में 11 की मौत, 616 घायल

ऐन ओ सलीश केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार, केवल जनवरी महीने में कम से कम 75 झड़पें हुईं। इनमें 11 लोगों की मौत और 616 लोग घायल हुए। वहीं, 21 से 31 जनवरी के बीच प्रचार अभियान शुरू होने के बाद 51 झड़पें दर्ज की गईं, जिनमें चार लोगों की जान चली गई। बांग्लादेश पुलिस मुख्यालय के मुताबिक, 12 दिसंबर 2025 से 26 जनवरी 2026 के बीच कुल 144 हिंसा की घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें: 55 झड़पें, 11 धमकाने के मामले,6 उम्मीदवारों पर हमले, 8 चुनावी कार्यालयों पर हमले व आगजनी, 17 चुनावी गतिविधियों में बाधा,24 अन्य आपराधिक घटनाएं शामिल हैं। Also Read-India US Trade Deal Benefits: US Trade Deal पर सरकार का बड़ा बयान: इंजीनियरिंग से ज्वेलरी तक खुले नए दरवाज़े

274 हिंसक घटनाएं

सरकार भी सतर्क मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस के प्रेस विंग के अनुसार, 12 दिसंबर से 1 फरवरी तक केवल 53 दिनों में 274 चुनावी हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं। हालांकि, सरकार का दावा है कि हालात पर नजर रखी जा रही है। तुलना करें तो 2014 के चुनाव के दौरान 530 घटनाएं हुई थीं, जिनमें 115 मौतें दर्ज की गई थीं, लेकिन मौजूदा हालात भी कम चिंताजनक नहीं माने जा रहे।  

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