आस्था का ऐसा सैलाब आपने नहीं देखा होगा!
सोचिए एक ऐसी सुबह, जब आपकी आंखें 3 बजे खुलती हैं, न ठंडी हवा की परवाह होती है, न नींद की... बस एक ही धुन होती है
"बोल बम!" आज सावन का तीसरा सोमवार है, और देश की हवाओं में शिव का नाम गूंज रहा है। महादेव के दरबार में भक्ति का ऐसा समंदर उमड़ा है, जिसे देखकर रूह कांप जाए लेकिन आस्था की लौ कभी नहीं बुझती।
उज्जैन: रात्रि 2:30 बजे ही भक्तों की सुबह हो गई
महाकालेश्वर मंदिर के कपाट रात
2:30 बजे खोल दिए गए। जैसे ही द्वार खुले, पूरा परिसर
भस्म आरती की पवित्र ऊर्जा से झूम उठा।
भक्तों ने सिर झुकाए, आंखें नम कीं और "हर हर महादेव" के जयकारों से अंधेरा भी रौशन हो गया। यहां न कोई समय की पाबंदी है, न थकान की शिकायत सिर्फ समर्पण है।
काशी: 3 किलोमीटर लंबी लाइन, फूलों की बारिश
काशी विश्वनाथ मंदिर में सुबह
3 बजे कपाट खुले और
4 बजे मंगला आरती हुई। भीड़ इतनी थी कि
3 किमी लंबी कतारें शहर की सड़कों पर शिव भक्ति का जुलूस बन गईं। प्रशासन ने श्रद्धालुओं पर फूलों की बारिश कर माहौल को और पावन बना दिया। यह कोई भीड़ नहीं थी, ये था
देश की आस्था का चेहरा, जिसमें बूढ़े, बच्चे, महिलाएं सभी एक ही भाव में डूबे थे
"जय भोलेनाथ!"
देवघर: कांवरियों का सैलाब, 4 किमी लंबी कतारें
बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर में सुबह
3 बजे मंदिर का द्वार खुला।
30,000 से ज्यादा कांवरिए भक्ति की कतार में थे। 4 किलोमीटर लंबी लाइन, और मंदिर परिसर में करीब
2 लाख श्रद्धालु मौजूद। जलाभिषेक की आराधना के साथ पूरा परिसर गूंज उठा
"ऊँ नम: शिवाय" की लहरों में डूबा हर चेहरा, हर आत्मा।
दूसरे मंदिरों की झलकियां हर कोने से शिवभक्ति
- अयोध्या के नागेश्वरनाथ मंदिर में भोर से ही भीड़ उमड़ी।
- हरिद्वार के दक्षेश्वर महादेव में जल चढ़ाने वालों की लंबी कतार।
- जयपुर के ताड़केश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की भक्ति लहर।
- अहमदाबाद के कोटेश्वर महादेव मंदिर में विशेष पूजा।
जहां भीड़ में भी दिल दहले बाराबंकी में भगदड़
जहां देश भक्ति में लीन था, वहीं
यूपी के बाराबंकी के औसानेश्वर मंदिर में भयानक भगदड़ हो गई।
2 श्रद्धालुओं की मौत, 29 घायल जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। ये हादसे हमें याद दिलाते हैं कि आस्था की भी अपनी ज़िम्मेदारी होती है।
सावन नहीं, ये श्रद्धा का समुद्र है
सावन के तीसरे सोमवार ने एक बात फिर साफ कर दी
भारत सिर्फ एक देश नहीं, ये एक भक्ति का उत्सव है। लोग मंदिरों में नहीं,
अपनी आस्था के भीतर खड़े हैं। और जब इतने करोड़ दिल एक नाम जपते हैं तो शायद शिव मुस्कराते होंगे... और बारिश भी आशीर्वाद बनकर बरसती होगी।
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