अनोखी कांवड़ यात्रा 2026

भक्ति और सेवा की अनोखी मिसाल ,90 साल की दादी को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से निकला पोता

हरिद्वार से दिल्ली की ओर जा रही कांवड़ यात्रा में 90 वर्षीय दादी को उनके पोते और बहू ने शामिल किया, जिसे देखने के लिए राहगीर रुक रहे हैं.

भक्ति और सेवा की अनोखी मिसाल ,90 साल की दादी को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से निकला पोता

कांवड़ मेला 2026 अभी शुरू भी नहीं हुआ है और सावन का पवित्र महीना भी आने वाला है. इसके बावजूद हरिद्वार में कांवड़ियों की आमद शुरू हो चुकी है. हर साल की तरह इस बार भी आस्था के अलग-अलग रंग दिखाई देने लगे हैं, लेकिन इस बार जो तस्वीर सामने आई है, उसने हर किसी को भावुक कर दिया. 
दरअसल, हरिद्वार से दिल्ली की ओर जा रही एक कांवड़ इन दिनों लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. इसकी वजह गंगाजल नहीं, बल्कि उस कांवड़ का दूसरा पलड़ा है, जिसमें 90 वर्ष से अधिक उम्र की एक बुजुर्ग महिला बैठी हैं. उनका पोता कंधों पर कांवड़ उठाकर चल रहा है, जबकि मां पूरी यात्रा में उसके साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही है.हाईवे पर जब भी यह परिवार "जय भोले" का उद्घोष करता हुआ आगे बढ़ता है तो राहगीर रुककर उन्हें देखते हैं. कई लोग इस अनोखी यात्रा को अपने मोबाइल में कैद कर रहे हैं, जबकि बड़ी संख्या में श्रद्धालु बहू और पोते को आशीर्वाद देते नजर आ रहे हैं.

मनीष ने बताया दादी की थी ये इच्छा 

यह परिवार दिल्ली के शाहदरा का रहने वाला है. पोते मनीष चौधरी ने बताया कि पिछले साल उनकी मां पारुल चौधरी गंगाजल लेने हरिद्वार आई थीं. उसी दौरान उनकी दादी ने भी हरिद्वार की यात्रा करने और इस धार्मिक यात्रा का हिस्सा बनने की इच्छा जताई थी.मनीष ने आगे कहा  पिछले वर्ष वह किसी कारणवश इस यात्रा में शामिल नहीं हो पाए थे. इस बार उन्होंने तय किया कि मां का अधूरा संकल्प पूरा करेंगे और दादी की इच्छा भी पूरी कराएंगे. इसी सोच के साथ वह अपनी मां के साथ हरिद्वार पहुंचे.हरिद्वार में गंगाजल भरने के बाद उन्होंने कांवड़ के एक पलड़े में गंगाजल रखा और दूसरे पलड़े में अपनी दादी को बैठाया. इसके बाद "जय भोले" के जयघोष के साथ दिल्ली की ओर यात्रा शुरू कर दी. 

बहू बोली- सास को कहने की जरूरत नहीं

मनीष की मां और चतरी देवी की बहू पारुल चौधरी भी इस यात्रा को अपने परिवार के लिए सौभाग्य मानती हैं. उन्होंने बताया कि उनकी सास को कभी उनसे कहने की जरूरत नहीं पड़ती. परिवार में सेवा और सम्मान की भावना अपने आप है.पारुल ने बताया कि कुछ समय पहले उन्होंने अपनी सास के साथ 84 कोस की पदयात्रा भी की थी, जिसकी वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई थी. उसी दौरान उनकी सास ने हरिद्वार जाने की इच्छा जताई थी.उन्होंने कहा, 'सास ने कहा कि मुझे हरिद्वार जाना है. मैंने कहा कि चलिए, हम सब साथ चलते हैं. फिर मैंने और मेरे बेटे ने तैयारी की और अपनी सास को हरिद्वार की यात्रा कराने के लिए घर से निकल पड़े.'

जय भोले' बोलते हुए दादी ने जताई खुशी

90 वर्ष से अधिक उम्र की चतरी देवी इस यात्रा से बेहद खुश हैं. जब उनसे पूछा गया कि पोता और बहू उन्हें कांवड़ में बैठाकर यात्रा करा रहे हैं तो कैसा लग रहा है, तो उन्होंने सबसे पहले "जय भोले" का जयकारा लगाया.इसके बाद उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि उन्हें बहुत अच्छा लग रहा है. परिवार के साथ इस तरह भगवान शिव की यात्रा करना उनके लिए किसी आशीर्वाद से कम नहीं है.

कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहले सामने आई यह तस्वीर सिर्फ शिवभक्ति की नहीं, बल्कि परिवार, संस्कार और बुजुर्गों के सम्मान की भी मिसाल बन गई है. हाईवे पर इस परिवार को देखने वाला हर व्यक्ति बहू और पोते के इस समर्पण की सराहना कर रहा है.

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