उन्होंने अधिकारियों से कहा कि राहत राशि जरूरतमंद परिवारों तक समय पर पहुंचे, इसके लिए पहले से सभी जरूरी तैयारियां पूरी कर ली जाएं। पानी उतरने के बाद प्रभावित इलाकों में लोगों को होने वाली परेशानियों को देखते हुए भी विभागों को जरूरी इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं। बाढ़ से हुए नुकसान और मरम्मत में आने वाले खर्च का भी आकलन किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को अपनी रिपोर्ट जल्द उपलब्ध कराने को कहा है।
गंगा, गंडक और सोन में बढ़ा जलस्तर
समीक्षा बैठक में जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने इस साल आई बाढ़ की स्थिति और इसके कारणों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बिहार में बाढ़ दो चरणों में आई। पहले चरण में गंगा, सोन, घाघरा, कोसी और पुनपुन नदियों में पुराने रिकॉर्ड की तुलना में अधिक जलस्तर दर्ज किया गया। इसके बाद दूसरे चरण में भारी बारिश के कारण गंडक नदी में चार स्थानों पर रिकॉर्ड स्तर का पानी पहुंचा। पश्चिम चंपारण, गोपालगंज और सारण में छह स्थानों पर तटबंधों को भी नुकसान पहुंचा। बाढ़ के कारण कई इलाकों में सड़कें प्रभावित हुईं और बड़ी आबादी को परेशानी का सामना करना पड़ा।
नदियों में सिल्ट जमा होना भी एक वजह
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस साल गंगा, गंडक और सोन नदियों में पिछले वर्षों के मुकाबले काफी अधिक पानी आया। इससे कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हुई। उन्होंने कहा कि नदियों के तल में सिल्ट यानी गाद जमा होना भी बाढ़ की एक प्रमुख वजह है। मुख्यमंत्री के मुताबिक बिहार देश का पहला राज्य है, जिसने सिल्ट नीति बनाई है। उन्होंने नदियों की स्थिति और बाढ़ से हुए नुकसान की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए।
सभी विभागों से मांगी गई नुकसान की रिपोर्ट
मुख्यमंत्री ने आपदा प्रबंधन विभाग को सभी संबंधित विभागों के साथ मिलकर नुकसान का आकलन करने को कहा। इसमें बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कों, तटबंधों और दूसरी सरकारी संपत्तियों की जानकारी शामिल होगी। इसके साथ ही क्षतिग्रस्त ढांचे की मरम्मत और दोबारा निर्माण में आने वाले खर्च का अनुमान भी तैयार किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि नुकसान की शुरुआती विस्तृत रिपोर्ट जल्द तैयार हो, ताकि प्रभावित इलाकों में राहत, पुनर्वास और जरूरी विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके।