हॉस्टल अधीक्षक को सरकारी नौकरी में फर्जी दस्तावेज़ के लिए सजा

हॉस्टल अधीक्षक दोषी करार

हॉस्टल अधीक्षक को सरकारी नौकरी में फर्जी दस्तावेज़ के लिए सजा

कोर्ट ने मोहन सिंह काजले को फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने पर 3 साल की सजा और जुर्माना सुनाया।

हॉस्टल अधीक्षक को सरकारी नौकरी में फर्जी दस्तावेज़ के लिए सजा

हॉस्टल अधीक्षक को सरकारी नौकरी में फर्जी दस्तावेज़ के लिए सजा |

फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज पर सरकारी नौकरी मामले में कोर्ट ने हॉस्टल अधीक्षक मोहन सिंह काजले को दोषी करार देते हुए 3 साल के कारावास और 27 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है। इसके साथ ही सहआरोपी उनकी सास भगवती बाई को भी दोषी मानते हुए 6 माह की जेल और 2 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है।

फर्जी अंकसूची में सरकारी नौकरी हासिल की

जांच में यह सामने आया कि आरोपी मोहन सिंह काजले ने स्नातक की फर्जी अंकसूची तैयार कर शासकीय नौकरी हासिल की थी। इसी आधार पर वह लगभग 10 सालों तक खरगोन जिले में विभिन्न पदों पर रहा। बाद में वह खालवा क्षेत्र में पदस्थ हुआ, जहां आदिम जाति कल्याण विभाग के अंतर्गत हॉस्टल अधीक्षक के रूप में उसे जिम्मेदारी दी गई। छैगांव माखन में पदस्थापना के दौरान आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज हुई।  इसके बाद आरोपी को निलंबित कर दिया था। वर्ष 2021 से यह मामला विचाराधीन था।

लगभग 5 सालों तक चली सुनवाई

बता दें कि खंडवा सिटी कोतवाली पुलिस ने दिसंबर 2020 में आरोपी के खिलाफ अपराध दर्ज किया था। पुलिस ने जांच पूरी कर 24 फरवरी 2021 को चालान न्यायालय में पेश किया। लगभग पांच वर्षों तक चली सुनवाई के बाद 25 अप्रैल 2026 (शनिवार) को द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश ने आरोपी मोहन सिंह काजले को दोषी करार दिया। आरोपी के खिलाफ न्यायालय ने फैसला सुनाने के बाद मीडिया वालों ने कैमरे में कैद करना चाहा तो वह मुंह पर कपड़ा रख न्यायालय परिषर में ही दौड़ लगाना शुरू कर दिया।
 

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