राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने चीता मित्रों से किया संवाद, जाना चीता संरक्षण के लि...

राष्ट्रपति मुर्मु ने की चीता मित्रों से चर्चा

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने चीता मित्रों से किया संवाद, जाना चीता संरक्षण के लिए कौन-कौन से हो रहे प्रयास?

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कूनो नेशनल पार्क में चीता संरक्षण पर चीता मित्रों से विस्तृत वार्ता की और चीतों की सुरक्षा के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने चीता मित्रों से किया संवाद जाना चीता संरक्षण के लिए कौन-कौन से हो रहे प्रयास

भोपाल। देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने अपने दो दिवसीय श्योपुर जिला स्थित कूनो नेशनल पार्क के प्रवास के दौरान 22 जून को चीता मित्रों से संवाद किया। उन्होंने चीता संरक्षण के प्रयासों की जानकारी भी ली। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने चीता मित्रों से चर्चा करते हुए उनके द्वारा चीतों की सुरक्षा और आमजन के बीच चीतों के व्यवहार को लेकर किए जा रहे जन-जागरूकता के प्रयासों के संबंध में भी जानकारी प्राप्त की। उन्होंने सभी चीता मित्रों से वन-टू-वन चर्चा कर परियोजना के लिए उनके द्वारा मानसेवी रूप से किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु को चीता मित्रों ने अवगत कराया कि कूनो नेशनल पार्क से लगे सभी ग्रामों में चीता मित्र मौजूद हैं, जिनके द्वारा चीतों की सुरक्षा के संबंध में ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है। चीतों के आबादी क्षेत्र में आवागमन की स्थिति पर किए जाने वाले कार्यों के संबंध में सभी को अवगत कराया गया है। ग्रामीणों को यह जानकारी भी दी जा रही है कि स्वाभाविक रूप से चीते किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते है। चीता जब आबादी क्षेत्र अथवा खेतों में दिखाई दे तो तत्काल वन विभाग को अवगत कराया जाए, जिससे उन्हें किसी भी प्रकार से नुकसान न पहुंचे। भारत में चीतों की पुनर्बसाहट के लिए यह परियोजना अति महत्वपूर्ण है। 

नेशनल पार्क में नामिबिया, दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना के चीते

इस दौरान चीता मित्र कुलदीप आदिवासी सिलोरी, संग्राम आदिवासी, राजनदंनी आदिवासी हथेडी, मल्हा आदिवासी सेसईपुरा, शिवम आदिवासी पालपुर, विनोद आदिवासी पैरा, रामलखन आदिवासी कराहल, लालाराम आदिवासी सेसईपुरा, दौलतराम आदिवासी सेसईपुरा और सतीश आदिवासी मोरावन मौजूद थे। उल्लेखनीय है कि कूनो नेशनल पार्क में चीतों की पुनर्स्थापन योजना को लगभग साढ़े तीन वर्ष से अधिक का समय हो गया है। नेशनल पार्क में नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका एवं बोत्सवाना से चीतों को लाया गया है। 

इतनी है भारत में जन्मे चीतों की संख्या

वर्तमान में देश में चीतों की संख्या 52 है, जिनमें से 49 चीते कूनो नेशनल पार्क में तथा 3 चीते मंदसौर स्थित गांधी सागर अभ्यारण में मौजूद हैं। भारत में जन्मे चीतों की संख्या 32 है। चीता प्रोजेक्ट निरंतर सफलता की ओर आगे बढ़ रहा है। बता दें, चीता मित्रों से संवाद के बाद राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु हेलीकॉप्टर से ग्वालियर रवाना हुईं। हेलीपेड पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल एवं जनप्रतिनिधि मौजूद थे।

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