इंदौर किसान आंदोलन

मुआवजा मांगने निकले किसानों पर वाटर कैनन! भोपाल कूच से पहले पुलिस एक्शन से गरमाई सियासत

इंदौर में किसानों ने पश्चिमी रिंग रोड परियोजना के लिए उचित मुआवजे की मांग की, प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को रोका, कई घायल।

मुआवजा मांगने निकले किसानों पर वाटर कैनन! भोपाल कूच से पहले पुलिस एक्शन से गरमाई सियासत

इंदौर में पश्चिमी रिंग रोड परियोजना के लिए अधिग्रहित की जा रही जमीन के बदले चार गुना मुआवजे की मांग को लेकर करणी सेना परिवार और किसानों ने सोमवार को ट्रैक्टरों के साथ भोपाल कूच का ऐलान किया। किसान जैसे ही भोपाल के लिए रवाना हुए, प्रशासन ने शिप्रा चौराहे पर बैरिकेड लगाकर उन्हें रोक दिया। इसके बाद मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बन गई और किसान वहीं धरने पर बैठ गए।

वाटर कैनन और आंसू गैस चलाने का आरोप

किसानों का आरोप है कि उन्हें आगे बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इस कार्रवाई में सात से दस किसान घायल हुए, जबकि कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया गया। हालांकि प्रशासन की ओर से इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

तीन साल से कर रहे आंदोलन

करणी सेना परिवार के इंदौर जिला अध्यक्ष ऋषिराज सिंह सिसोदिया ने कहा कि किसान पिछले तीन वर्षों से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। इस दौरान करीब 50 ज्ञापन प्रशासन को सौंपे गए, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। उनका कहना है कि किसान मुख्यमंत्री तक अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से पहुंचाना चाहते थे, लेकिन उन्हें बलपूर्वक रोक दिया गया।

मुआवजे को लेकर किसानों की नाराजगी

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ग्रेटर रिंग रोड परियोजना से 39 गांवों के 991 किसान प्रभावित हो रहे हैं और करीब 4,442 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण के दायरे में है। किसानों का दावा है कि क्षेत्र में जमीन की बाजार कीमत एक करोड़ से साढ़े तीन करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक है, जबकि मुआवजा केवल 18 से 42 लाख रुपये प्रति एकड़ दिया जा रहा है। उनका कहना है कि वे विकास के विरोध में नहीं, बल्कि उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

आंदोलन जारी रखने की चेतावनी

करणी सेना परिवार के नेताओं और किसानों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने डंपर लगाकर रास्ता बंद किया, बल प्रयोग किया और दबाव बनाकर कुछ किसानों की रजिस्ट्री भी कराई गई। किसानों का कहना है कि इंदौर-देवास वेस्टर्न रिंग रोड परियोजना और सिंहस्थ-2028 जैसे विकास कार्यों का वे विरोध नहीं करते, लेकिन उपजाऊ जमीन के बदले न्यायसंगत मुआवजा चाहते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, आंदोलन जारी रहेगा।

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