मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल के रजिस्ट्रार मुकेश सिंह को उनके पद से हटा दिया गया है। यह कार्रवाई डिप्टी सीएम एवं लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेंद्र शुक्ल के निर्देश के बाद की गई है। लंबे समय से नर्सिंग परीक्षाओं में गड़बड़ी और परिणामों में देरी को लेकर छात्रों में नाराजगी बनी हुई थी।
छात्रों के प्रदर्शन का दिखा असर
भोपाल स्थित नर्सिंग काउंसिल कार्यालय के बाहर छात्र पिछले पांच दिनों से लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। विभिन्न मांगों को लेकर छात्र संगठन सरकार और प्रशासन के खिलाफ विरोध दर्ज करा रहे थे। अब रजिस्ट्रार को हटाने के फैसले को छात्रों के आंदोलन से जोड़कर देखा जा रहा है।
8 अगस्त से धरने पर बैठे छात्र
नर्सिंग स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (NSO) के सदस्य 8 अगस्त से अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। संगठन का आरोप है कि परीक्षाओं और परिणामों से जुड़ी प्रक्रियाओं में लगातार लापरवाही बरती जा रही है, जिससे हजारों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
जीएनएम छात्रों की प्रमुख मांग
धरने पर बैठे छात्रों की सबसे बड़ी मांग सभी जीएनएम विद्यार्थियों के लंबित परिणाम घोषित करने की है। छात्रों का कहना है कि परिणामों में देरी के कारण उनकी पढ़ाई और रोजगार संबंधी योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। इसके साथ ही आगामी परीक्षाओं की तारीख जल्द घोषित करने की भी मांग की जा रही है।
बीएससी नर्सिंग छात्रों की चिंता
बीएससी नर्सिंग के विद्यार्थियों ने भी परिणाम जारी करने और लंबित परीक्षाएं कराने की मांग उठाई है। छात्रों का कहना है कि समय पर रिजल्ट नहीं आने से उच्च शिक्षा और नौकरी के अवसर प्रभावित हो रहे हैं।
छात्रवृत्ति और संस्थागत सुधार की मांग
प्रदर्शनकारी छात्रों ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी वर्ग तथा पैरामेडिकल छात्रों के लिए छात्रवृत्ति जारी करने की मांग की है। साथ ही ईडब्ल्यूएस और सामान्य वर्ग के छात्रों को भी छात्रवृत्ति का लाभ देने की मांग रखी गई है।
व्यवस्था सुधार पर भी जोर
छात्रों ने नर्सिंग और पैरामेडिकल संस्थानों को जबलपुर स्थित मेडिकल यूनिवर्सिटी से जोड़ने तथा फैकल्टी मैनेजमेंट सिस्टम लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि इन सुधारों से शिक्षा व्यवस्था अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बन सकेगी।
रिजल्ट में देरी से बढ़ी परेशानी
छात्रों का कहना है कि परीक्षा प्रबंधन में गड़बड़ी और रिजल्ट में लगातार देरी के कारण उन्हें मानसिक तनाव और करियर संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसी वजह से वे अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखे हुए हैं।