झारखंड में राज्यसभा चुनाव के नतीजों के बाद राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। इसी बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का अचानक दिल्ली दौरा और उसके तुरंत बाद परिवार सहित शिरडी पहुंचना सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, मुख्यमंत्री की दिल्ली यात्रा के दौरान किन नेताओं से मुलाकात हुई और किन मुद्दों पर बातचीत हुई, इसे लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। बावजूद इसके, राजनीतिक विश्लेषक इस दौरे को राज्य की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और महागठबंधन के भीतर उभर रही चुनौतियों से जोड़कर देख रहे हैं।
राज्यसभा चुनाव के बाद पैदा हुई परिस्थितियों के बीच मुख्यमंत्री की गतिविधियों ने राजनीतिक हलकों में कई तरह के कयासों को जन्म दिया है। विपक्ष से लेकर सत्ता पक्ष तक, सभी की नजरें अब झारखंड की आगामी राजनीतिक दिशा पर टिकी हुई हैं।
परिवार सहित शिरडी पहुंचे मुख्यमंत्री
CM सोरेन परिवार सहित पहुंचे शिर्डी
दिल्ली दौरे के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी एवं विधायक कल्पना सोरेन तथा परिवार के अन्य सदस्यों के साथ महाराष्ट्र के शिरडी पहुंचे। यहां उन्होंने साईं बाबा मंदिर में पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया। शिरडी साईं संस्थान की ओर से मुख्यमंत्री और कल्पना सोरेन का सम्मान भी किया गया।
मुख्यमंत्री ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में शिरडी यात्रा के अनुभव साझा करते हुए कहा कि साईं बाबा के दर्शन से उन्हें मानसिक शांति और आत्मिक सुकून प्राप्त हुआ। उनकी यह यात्रा आध्यात्मिक कार्यक्रम के रूप में देखी जा रही है, लेकिन राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच इसके समय को लेकर चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।
राज्यसभा चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस में बढ़ी बेचैनी
राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने महागठबंधन के भीतर नई बहस को जन्म दिया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम और एनडीए समर्थित परिमल नाथवानी की जीत के बाद कांग्रेस खेमे में निराशा का माहौल बताया जा रहा है।
कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की हार के बाद गठबंधन सहयोगियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस नेताओं ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और भाकपा-माले पर अपेक्षित सहयोग नहीं देने का आरोप लगाया है। वहीं, दोनों दलों ने भी कांग्रेस नेतृत्व की रणनीति और चुनाव प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं। इससे महागठबंधन के भीतर समन्वय और एकजुटता को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
कांग्रेस का चुनावी चिन्ह
क्या नए राजनीतिक समीकरणों की तलाश में है झामुमो?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के झारखंड लौटने के बाद गठबंधन की स्थिति और भविष्य की रणनीति पर महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक हो सकती है। राज्यसभा चुनाव के परिणामों ने सहयोगी दलों के रिश्तों और राजनीतिक समीकरणों पर नए सिरे से विचार करने की जरूरत पैदा कर दी है।
इसी बीच राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि झामुमो भविष्य में नए राजनीतिक विकल्पों पर विचार कर सकता है। हालांकि, जयराम महतो, सरयू राय या भाजपा के संभावित समर्थन जैसे किसी भी समीकरण को लेकर अब तक कोई आधिकारिक संकेत सामने नहीं आया है। फिलहाल ये चर्चाएं केवल राजनीतिक अटकलों और विश्लेषणों तक सीमित हैं।