लेकिन इस बार खास बात यह है कि...
नवरात्रि का चौथा दिन एक नहीं बल्कि दो दिनों तक मनाया जाएगा। इसके पीछे ज्योतिषीय कारण हैं। पंचांग के अनुसार जब किसी तिथि का प्रारंभ एक दिन में देर से होता है और दूसरे दिन तक चलता है, तो उस तिथि को द्वितीया-तिथि मानकर दो दिनों पर विभाजित किया जाता है। इस स्थिति को वृद्धि तिथि कहा जाता है। ऐसा होने पर भक्तों को अवसर मिलता है कि वे दोनों दिनों में मां की पूजा-अर्चना कर सकें।
इस वर्ष चतुर्थी तिथि का प्रारंभ रात में देर से हुआ
जबकि पंचमी का आरंभ उससे पहले ही हो गया। इस कारण चतुर्थी तिथि का पूर्ण पूजन समय अगले दिन भी रहेगा। परंपरागत नियम के अनुसार यदि कोई तिथि सूर्योदय के समय रहती है, तो वही दिन मुख्य रूप से उस तिथि का माना जाता है, लेकिन भक्त श्रद्धा और सुविधा अनुसार दोनों दिनों में पूजन कर सकते हैं।
माता कूष्मांडा की आराधना का महापर्व
इस प्रकार नवरात्र का चौथा दिन, यानी माता कूष्मांडा की आराधना का महापर्व दो दिनों तक मनाया जाएगा। इसका धार्मिक महत्व यह है कि मां भक्तों का कल्याण करने वाली हैं और उन्हें प्रसन्न करने के लिए यदि एक दिन की जगह दो दिन भी पूजा का अवसर मिले तो यह और भी शुभ माना जाता है।
इस बार चौथे दिन की पूजा दोहरे फल प्रदान करेगी। इस दौरान व्रत, पूजा और भक्ति में लीन होकर लोग स्वास्थ्य, धन और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
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