पारंपरिक ब्यूटी सीक्रेट: लौंग का लेप

घर पर बनाकर लगाएं ये देसी लेप, चेहरे पर लौटेगा निखार 

पारंपरिक भारतीय ब्यूटी सीक्रेट में लौंग का इस्तेमाल मुंहासे और त्वचा की लालिमा कम करने के लिए किया जाता है। जानें इसे कैसे तैयार किया जाता था।

घर पर बनाकर लगाएं ये देसी लेप, चेहरे पर लौटेगा निखार 

चेहरे की देखभाल के लिए प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल किया जाता था. जली हुई लौंग से तैयार किया गया लेप भी ऐसा ही एक पारंपरिक ब्यूटी सीक्रेट माना जाता है. जानें इसे कैसे तैयार किया जाता था, मुंहासों में क्यों इस्तेमाल होता था और चेहरे पर लगाने से पहले किन सावधानियों का ध्यान रखें.

आज के दौर में लोग चेहरे की खूबसूरती और त्वचा की देखभाल के लिए फेशियल, फेस सीरम, शीट मास्क और महंगे स्किन ट्रीटमेंट का सहारा लेते हैं. लेकिन पुराने समय में त्वचा की देखभाल के लिए घर में मौजूद प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल किया जाता था. हल्दी-चंदन का उबटन के बारे में तो आज भी लोग जानते हैं, लेकिन पुराने जमाने में इनके अलावा लौंग का इस्तेमाल भी एक पारंपरिक ब्यूटी सीक्रेट माना जाता था.

उत्तर भारत और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में आज भी कुछ परिवारों में लौंग को भूनकर या जलाकर तैयार किए गए पेस्ट का इस्तेमाल पारंपरिक तौर पर किया जाता है. माना जाता है कि लौंग से तैयार लेप को मुंहासे या लालिमा वाली जगह पर लगाने से स्किन को शांत करने में मदद मिल सकती है. हालांकि, इसे मुंहासों या दाग-धब्बों का पक्का इलाज नहीं माना जा सकता.

कैसे तैयार किया जाता था यह पारंपरिक लेप?

पारंपरिक तौर पर साबुत लौंग को हल्का भूनने या जलाने के बाद पीसकर पाउडर बनाया जाता था. इसके बाद इसमें घी, गुलाब जल, शहद, मलाई, चंदन पाउडर या नारियल तेल जैसी चीजें मिलाकर पेस्ट तैयार किया जाता था. इस मिक्सर को पूरे चेहरे पर लगाने के बजाय आमतौर पर मुंहासे या लालिमा वाली जगह पर लगाया जाता था.

मुंहासों के लिए क्यों किया जाता था इस्तेमाल?

लौंग में यूजेनॉल नामक प्राकृतिक कंपाउंड पाया जाता है, जिसके एंटीमाइक्रोबियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों पर चर्चा की गई है. इसी वजह से पारंपरिक चिकित्सा में लौंग का इस्तेमाल कई तरह से किया जाता रहा है. हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि जली हुई लौंग चेहरे के मुंहासे या दाग-धब्बे पूरी तरह खत्म कर देती है.

चेहरे पर लगाने से पहले बरतें सावधानी

लौंग एक कॉन्सेंट्रेटेड इंग्रीडिएंट है और इसे सीधे त्वचा पर लगाने से कुछ लोगों को जलन, खुजली, लालिमा, सूखापन या एलर्जी हो सकती है. संवेदनशील त्वचा, एक्जिमा या रोसैसिया वाले लोगों को खास सावधानी बरतनी चाहिए.

नोट: इसलिए जली हुई लौंग का यह नुस्खा भारतीय पारंपरिक सौंदर्य देखभाल की एक दिलचस्प मिसाल जरूर है, लेकिन इसे चमत्कारी स्किन ट्रीटमेंट न समझें. अगर आप इसे आजमाना चाहते हैं, तो पहले त्वचा के छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट करें और किसी भी तरह की जलन होने पर तुरंत इस्तेमाल बंद कर दें. अपने डर्मेटोलॉजिस्ट से सलाह जरूर लें.


 

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