उत्तराखंड की राजनीति के सबसे सख्त, ईमानदार और अनुशासित चेहरों में शामिल रहे मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी अब नहीं रहे। सेना की वर्दी से लेकर मुख्यमंत्री की कुर्सी तक का उनका सफर उत्तराखंड राज्य ही नहीं, देश की राजनीति में एक मिसाल माना जाता है।
एक युग समाप्त
पूर्व मुख्यमंत्री लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। खंडूरी का मंगलवार को मैक्स अस्पताल में निधन हो गया। उनके निधन से उत्तराखंड की राजनीति का एक युग समाप्त हो गया है। वह 91 साल के थे और पिछले 50 दिनों से देहरादून के मैक्स सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल में भर्ती थे। लंबे समय से हृदय संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शनों के लिए देहरादून स्थित आवास पर रखा गया है, जबकि बुधवार यानि कल हरिद्वार में अंतिम संस्कार होगा।
नेताओं में शोक की लहर
खंडूरी के निधन के बाद BJP कार्यकर्ताओं, समर्थकों और नेताओं में शोक की लहर है। उनके आवास पर नेताओं और समर्थकों का पहुंचना जारी है। सेना से जुड़े अधिकारी भी अस्पताल पहुंचे। उनके बेट मनीष खंडूरी ने X पर पोस्ट कर लिखा- वह मेरे सब कुछ थे, मेरे पिता, मेरे भगवान। PM नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि बीसी खंडूरी ने सेना से लेकर राजनीति तक बहुमूल्य योगदान दिया। मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री रहते हुए उन्होंने उत्तराखंड के विकास और देशभर में बेहतर कनेक्टिविटी के लिए काम किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी उनके निधन को उत्तराखंड और राष्ट्रीय राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति बताया।
PM ने जताया दुख
सैनिक, जनप्रतिनिधि और प्रशासक
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी सोशल मीडिया पोस्ट कर बीसी खंडूरी के निधन पर शोक जताया। उन्होंने कहा कि भुवन चंद्र खंडूरी एक शानदार सैनिक, जनप्रतिनिधि और प्रशासक थे। सांसद, केंद्रीय मंत्री और CM के रूप में उन्होंने अपने दायित्वों का निर्वहन गौरव के साथ किया और उनका व्यक्तित्व अजातशत्रु था।