कोलकाता HC का बड़ा फैसला: नाबालिग अब अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं

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कोलकाता HC का बड़ा फैसला: नाबालिग अब अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं

कोलकाता hc का बड़ा फैसला नाबालिग अब अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं

अब नाबालिग भी गिरफ्तारी से पहले जमानत ले सकेंगे।

kolkata hc juvenile anticipatory bail 2025: कोलकाता हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि अब किसी भी अपराध में आरोपी नाबालिग भी अग्रिम जमानत (anticipatory bail) के लिए आवेदन कर सकते हैं। इससे पहले केवल 18 साल से अधिक उम्र के आरोपियों को ही यह अधिकार था। तीन जजों की डिवीजन बेंच ने यह फैसला जस्टिस जय सेनगुप्ता, जस्टिस तीर्थंकर घोष और जस्टिस बिवास पटनायक की अध्यक्षता में सुनाया। यह देश में हाईकोर्ट स्तर पर ऐसा पहला फैसला है, जिसमें नाबालिगों के अग्रिम जमानत के अधिकार को मान्यता दी गई।

 जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 में स्पष्ट मनाही नहीं

यह मामला चार नाबालिगों की याचिका से शुरू हुआ। ये नाबालिग 2021 में पश्चिम बंगाल के रघुनाथगंज पुलिस स्टेशन में दर्ज मामलों में गिरफ्तारी के डर से अग्रिम जमानत चाहते थे।मुद्दा था कि क्या जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, 2015 के तहत नाबालिगों को धारा 438 के तहत अग्रिम जमानत का अधिकार है या नहीं। चूंकि इस पर पहले जजों की राय अलग थी, इसलिए सिंगल जज ने इसे बड़ी पीठ के पास भेजा ताकि अंतिम फैसला लिया जा सके।

तीन जजों का फैसला- 4 पॉइंट में

1. दो जजों की सहमति

जस्टिस जय सेनगुप्ता और जस्टिस तीर्थंकर घोष ने कहा कि नाबालिगों को अग्रिम जमानत न देने का मतलब होगा कि बच्चों से वह अधिकार छीन लिया जाए जो बालिगों को मिलता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान में दी गई व्यक्तिगत स्वतंत्रता को कम करने का कोई इरादा नहीं था। जुवेनाइल जस्टिस एक्ट बच्चों की भलाई के लिए बना है, लेकिन इसे ऐसे कानून के रूप में नहीं माना जा सकता जो उन्हें अग्रिम जमानत जैसी कानूनी सुरक्षा से रोक दे। अग्रिम जमानत मिलने पर भी कोर्ट नियम तय कर सकती है कि यह JJ बोर्ड के काम में हस्तक्षेप न करे।

2. एक जज की असहमति

जस्टिस बिवास पटनायक ने असहमति जताई। उनका कहना था कि नाबालिगों को अग्रिम जमानत देने से JJ एक्ट की सुरक्षा व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है। गिरफ्तारी के बाद बच्चों के लिए जो कल्याण-आधारित जांच प्रक्रिया तय है, वह अग्रिम जमानत से प्रभावित हो सकती है।

बच्चों के कानूनी अधिकारों के लिऐ मील का पत्थर

कोलकाता HC का यह फैसला बच्चों के कानूनी अधिकारों के लिहाज से मील का पत्थर है। अब नाबालिग अपराधियों को भी गिरफ्तारी से पहले सुरक्षा का विकल्प मिलेगा। विशेष रूप से ऐसे मामलों में, जहां गिरफ्तारी से पहले बच्चों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को खतरा हो, यह निर्णय महत्वपूर्ण साबित होगा। Read More:- जब ज़िंदगी ने गिराया… तभी सीखा उठना वो सच्ची कहानी जो दिल छू जाए

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