चित्रकूट: हर्रा गांव में चकबंदी अनियमितताओं पर ग्रामीणों का आक्रोश, चकों के बंटवारे में मनमानी

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चित्रकूट: हर्रा गांव में चकबंदी अनियमितताओं पर ग्रामीणों का आक्रोश, चकों के बंटवारे में मनमानी

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Chitrakoot land consolidation irregularities: चित्रकूट जिले के मौजा हर्रा गांव में चकबंदी प्रक्रिया को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। किसानों ने आरोप लगाया है कि चकबंदी प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की जा रही हैं, जिसके चलते उनकी जमीन का रकबा लगातार कम हो रहा है। इस अनियमितता ने न केवल उनकी खेती को प्रभावित किया है, बल्कि आर्थिक नुकसान भी पहुंचाया है। ग्रामीणों ने चकबंदी आयुक्त से निष्पक्ष जांच की मांग की है और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की अपील की है।

दोहरी कटौती से किसानों की जमीन घटी

ग्रामीणों के अनुसार, चकबंदी प्रक्रिया के दौरान नियमानुसार पहले 5 प्रतिशत जमीन की कटौती की गई थी। लेकिन अब दोबारा भूमि की नाप के समय राजस्व अमीन और कानूनगो द्वारा फिर से 5 प्रतिशत की कटौती की जा रही है। इस दोहरी कटौती के कारण कई किसानों की जमीन का आकार काफी कम हो गया है, जिससे खेती करना बेहद मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि इस अनुचित कटौती ने उनकी आजीविका पर गहरा असर डाला है। [caption id="attachment_91896" align="alignnone" width="468"]मौजा हर्रा गांव में चकबंदी प्रक्रिया को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी मौजा हर्रा गांव में चकबंदी प्रक्रिया को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी[/caption]

Chitrakoot land consolidation irregularities: चकों के बंटवारे में मनमानी

किसानों ने चकों के बंटवारे में भी भारी मनमानी का आरोप लगाया है। धारा 52 के तहत बिना पूर्व सूचना के एकपक्षीय आदेश जारी किए गए हैं, जिसके चलते कई किसानों के चक छोटे-छोटे टुकड़ों में बिखर गए हैं। इन टुकड़ों को स्थानीय भाषा में "उड़ान चक" कहा जाता है, जो खेती के लिए उपयोग करना लगभग असंभव है। इससे किसानों को न केवल आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि उनकी जमीन का व्यावहारिक उपयोग भी कठिन हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि चकबंदी प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव साफ दिखाई देता है। Read More: चित्रकूट: दबंगों से परेशान विधवा महिला..कच्चे मकान पर कब्जे का आरोप

जांच और कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने चकबंदी आयुक्त से पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक धारा 52 के तहत प्रस्तावों पर रोक लगाई जाए। इसके अलावा, दोषी राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग भी उठ रही है। किसानों ने यह भी बताया कि कई पुराने संदर्भों और वादों का निस्तारण अब तक नहीं हुआ है, और पहले के आदेशों की भी अनदेखी की जा रही है। इस तरह की अनियमितताओं ने किसानों के बीच अविश्वास और असंतोष को बढ़ावा दिया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सामूहिक आंदोलन शुरू करेंगे। सुरेन्द्र सिंह कछवाह की रिपोर्ट

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