स्वच्छ शहर की सड़ती तस्वीर! : हाईकोर्ट ने कहा-17 मौतों पर सरकार का जवाब संवेदनशील नहीं

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स्वच्छ शहर की सड़ती तस्वीर! : हाईकोर्ट ने कहा-17 मौतों पर सरकार का जवाब संवेदनशील नहीं

स्वच्छ शहर की सड़ती तस्वीर  हाईकोर्ट ने कहा-17 मौतों पर सरकार का जवाब संवेदनशील नहीं

indore water contamination: इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से हुई मौतों का मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में गरमाया हुआ है. कोर्ट ने साफ कहा है. कि इस घटना ने देशभर में शहर की छवि को बड़ा नुकसान पहुंचाया है. इंदौर देश का सबसे स्वच्छ शहर है, लेकिन अब दूषित पानी के कारण चर्चा में है, जो बेहद चिंताजनक है.अगली सुनवाई में मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को वर्चुअल रूप से कोर्ट में उपस्थित होने के लिए कहा गया है। अगली सुनवाई 15 जनवरी को होगी।

indore water contamination: दूषित पानी से मौतों का आंकड़ा

अब तक दूषित जल पीने से 17 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. अस्पतालों में कुल 110 मरीज भर्ती हैं, जबकि कुल 421 मरीजों को अब तक अस्पताल में भर्ती किया जा चुका है। इनमें से 311 मरीज ठीक होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं। 15 मरीजों का इलाज आईसीयू में जारी है। वहीं उल्टी-दस्त के 38 नए मामले सामने आए हैं, जिनमें 6 मरीजों को गंभीरता से अरबिंदो हॉस्पिटल रेफर किया गया है.

indore water contamination: जो पानी मिल रहा पीने लायक नहीं

31 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट ने सरकार और नगर निगम को निर्देश दिया था कि जनता को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाए। हालांकि याचिकाकर्ताओं के वकील का कहना है कि प्रभावित इलाके में अब भी पानी दूषित है और पीने लायक नहीं है. याचिकाओं में ये भी कहा गया कि इससे पहले स्थानीय निवासियों की कई बार शिकायतें प्रशासन को की गई थीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अगर समय पर समस्या को गंभीरता से लिया गया होता तो यह दुखद घटना नहीं होती।

2022 में बनी पाइपलाइन के लिए फंड नहीं मिला

सीनियर काउंसिल ने कोर्ट को बताया कि महापौर ने 2022 में पीने के पानी की नई पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव पास किया था, पर फंड न मिलने की वजह से काम अभी तक शुरू नहीं हो पाया।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट पर कार्रवाई नहीं

2017-18 में पीने के पानी के 60 सैंपल लिए गए थे, जिनमें से 59 दूषित पाए गए थे, लेकिन इसके बाद भी कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। याचिकाकर्ताओं ने अधिकारियों को न केवल सिविल बल्कि आपराधिक जिम्मेदारी के लिए भी दोषी ठहराया है। इस कारण उच्चस्तरीय जांच समिति बनाने की मांग की गई है।
कोर्ट ने मांगी नई स्टेटस रिपोर्ट
हाईकोर्ट ने सरकार और नगर निगम को निर्देश दिया है कि वे अपनी प्रतिक्रिया और हाल की स्थिति पर नई स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट में पेश करें। कोर्ट ने जीवन के अधिकार के तहत स्वच्छ पेयजल के अधिकार पर भी जोर दिया है।
पिछली सुनवाई में क्या हुआ था?
2 जनवरी की सुनवाई में कोर्ट को बताया गया था कि 4 मौतें हुई हैं। नगर निगम ने स्टेटस रिपोर्ट दी थी जिसमें बताया गया कि प्रभावित इलाके में टैंकर से पानी सप्लाई किया जा रहा है और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है। जोनल अधिकारी और असिस्टेंट इंजीनियर सस्पेंड कर दिए गए हैं, वहीं सब इंजीनियर की सेवा समाप्त कर दी गई है।  

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