चमोली टनल हादसा अपडेट

चमोली टनल हादसा 42 घंटे बाद 8वां शव बरामद,रेस्क्यू ऑपरेशन के सामने दलदल की बड़ी चुनौती

उत्तराखंड के चमोली में विष्णुगाड़-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की टनल में हादसे के बाद 19 मजदूर निकाले गए, 7 की मौत, 3 अभी भी लापता।

By : सोनिया रायकवार
चमोली टनल हादसा 42 घंटे बाद 8वां शव बरामद,रेस्क्यू ऑपरेशन के सामने दलदल की बड़ी चुनौती

उत्तराखंड के चमोली जिले में विष्णुगाड़-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन टनल में हुए हादसे के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है। 13 अगस्त की शाम टनल के अंदर अचानक पानी और मलबा आने से 22 मजदूर फंस गए थे। ताजा उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक 19 मजदूरों को बाहर निकाला जा चुका है, जिनमें 7 की मौत हो गई, जबकि 3 मजदूर अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

टनल के अंदर पानी और मलबा बना सबसे बड़ी चुनौती

रेस्क्यू टीमों के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती टनल के अंदर लगातार जमा हो रहा पानी और मलबा है। पानी को बाहर निकालने के लिए डिवाटरिंग पंप लगाए गए हैं, लेकिन रिसाव के कारण ऑपरेशन आसान नहीं है। पानी कम होने के बाद भी राहत टीमों के सामने मुश्किल खत्म नहीं होती। पानी के साथ आया मलबा कई जगह दलदल में बदल गया है। ऐसे में रेस्क्यूकर्मियों को बेहद सावधानी के साथ आगे बढ़ना पड़ रहा है।

कैसे चल रहा है रेस्क्यू ऑपरेशन?

टनल के अंदर सबसे पहले पानी का स्तर कम करने की कोशिश की जा रही है। इसके बाद मलबा हटाकर रास्ता बनाया जा रहा है। रेस्क्यू टीमों को पानी निकालने, मलबा हटाने और सुरक्षित रास्ता तैयार करने का काम एक साथ करना पड़ रहा है। ऑपरेशन में THDC, HCC, NDRF, SDRF, CISF और जिला प्रशासन की टीमें जुटी हुई हैं। टीमें लगातार शिफ्ट में काम कर रही हैं और लापता मजदूरों तक पहुंचने की कोशिश जारी है।

अचानक इतना पानी और मलबा आया कहां से?

हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि टनल के अंदर अचानक इतनी बड़ी मात्रा में पानी और मलबा कहां से आया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक टनल के एक हिस्से में अचानक पानी और मलबे का तेज प्रवाह आया, जिसके बाद वहां काम कर रहे मजदूरों को बाहर निकलने का मौका बेहद कम मिला। हादसे के कारणों की विस्तृत जांच आगे की जाएगी।

पहाड़ के अंदर पानी का रास्ता कैसे बनता है?

जिस इलाके में टनल बनाई जा रही है, वहां पहाड़ों की चट्टानों के बीच मौजूद प्राकृतिक दरारें और फ्रैक्चर पानी के लिए रास्ता बना सकते हैं। ऊपर से पहाड़ ठोस दिखाई देने के बावजूद उसके अंदर मौजूद दरारों में पानी जमा हो सकता है और दबाव बढ़ने पर यह पानी टनल की ओर आ सकता है।विष्णुगाड़-पीपलकोटी परियोजना कठिन भूगर्भीय परिस्थितियों वाले हिमालयी क्षेत्र में स्थित है। परियोजना से जुड़े तकनीकी अध्ययनों में भी क्षेत्र की प्रतिकूल भूगर्भीय परिस्थितियों का उल्लेख किया गया है।

दलदल में सर्च करना इतना मुश्किल क्यों?

पानी और मिट्टी-मलबे के मिश्रण से टनल के अंदर कई जगह दलदल जैसी स्थिति बन गई है। ऐसी जगहों पर सामान्य तरीके से आगे बढ़ना जोखिम भरा होता है। रेस्क्यू टीम को हर कदम बेहद सावधानी से रखना पड़ रहा है, क्योंकि मलबे के नीचे जमीन की स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसके अलावा लगातार पानी का रिसाव ऑपरेशन को और चुनौतीपूर्ण बना रहा है।

हादसे के बाद परिवारों की बढ़ी चिंता

टनल हादसे में लापता मजदूरों के परिवार लगातार उनके सुरक्षित बाहर आने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। प्रशासन और रेस्क्यू एजेंसियों का पूरा ध्यान अब भी टनल के अंदर फंसे मजदूरों की तलाश पर है। रेस्क्यू ऑपरेशन तब तक जारी रहेगा, जब तक सभी लापता मजदूरों का पता नहीं चल जाता। हादसे ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में बड़े निर्माण और सुरंग परियोजनाओं में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

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