सीएम डॉ. मोहन ने की सिंहस्‍थ की तैयारियों की समीक्षा, बताया कहां-कहां, क्या-क्या हो रहे काम

ऊर्जा और स्वच्छता पर मध्यप्रदेश समीक्षा बैठक

सीएम डॉ. मोहन ने की सिंहस्‍थ की तैयारियों की समीक्षा, बताया कहां-कहां, क्या-क्या हो रहे काम

मध्यप्रदेश में ऊर्जा और स्वच्छता पर राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में केंद्रीय और राज्य सरकार के मुख्य अधिकारियों ने भाग लिया। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों पर चर्चा की गई।

सीएम डॉ मोहन ने की सिंहस्‍थ की तैयारियों की समीक्षा बताया कहां-कहां क्या-क्या हो रहे काम

 मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केन्द्रीय ऊर्जा, शहरी विकास एवं आवासन मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने प्रशासनिक संकुल भवन स्थित कलेक्टर कार्यालय में ऊर्जा एवं स्वच्छ भारत मिशन की राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक ली। बैठक में मंत्री खट्टर ने कहा कि सिंहस्थ 2028 के लिए नगरीय विकास विभाग द्वारा स्वच्छता, पेयजल, भोजन व्यवस्था, सुरक्षा, परिवहन तथा स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित सभी कार्य प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण किए जाएं। सिंहस्थ महापर्व राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय महत्व का आयोजन है, इसलिए सभी व्यवस्थाएं उसी स्तर के अनुरूप सुनिश्चित की जाएं। बैठक में स्वच्छ भारत मिशन की समीक्षा के दौरान ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, उपयोग किए जा चुके जल के पुनर्प्रबंधन तथा शौचालय निर्माण कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक में केंद्रीय मंत्री खट्टर की उपस्थिति में आईआईएम इंदौर, शहरी विकास और आईआईएम नागपुर के मध्‍य एमओयु भी साइन किया गया। इस मौके पर सीएम डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश आगे बढ़ रहा है, मध्य प्रदेश सरकार भी सभी विभागों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद पहली बार केंद्रीय मंत्री उज्जैन आकर प्रदेश की समीक्षा कर रहे हैं और बारीकी से मार्गदर्शन दे रहे हैं।

बैठक में केन्द्रीय मंत्री खट्टर ने कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए मॉनिटरिंग सिस्टम को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रदेश की सभी 16 स्मार्ट सिटीज़ में स्वच्छता के व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु प्रभावी आईईसी (सूचना, शिक्षा एवं संचार) मॉडल विकसित कर डिजिटल माध्यमों से जन-जागरूकता अभियान संचालित करने के निर्देश दिए। साथ ही व्यक्तिगत एवं सामुदायिक शौचालयों की आवश्यकता का सर्वे कर वास्तविक मांग के अनुसार स्वीकृति प्रस्ताव भेजने तथा सामुदायिक शौचालयों की स्वच्छता एवं रखरखाव पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में स्वच्छता अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ संचालित किया जा रहा है। सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए अभियान को और अधिक प्रभावी बनाएं।

सीएम ने केंद्रीय मंत्री को दी अहम जानकारी

बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्रीय मंत्री को सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं को स्वच्छ जल उपलब्ध कराने के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने केन्द्रीय मंत्री को कान्ह क्‍लोज डक्ट डायवर्जन परियोजना तथा सिलारखेड़ी-सेवरखेड़ी परियोजना की प्रगति से अवगत कराया। विद्युत वितरण एवं परिचालन क्षेत्र की समीक्षा के दौरान केन्द्रीय मंत्री खट्टर ने रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) के अंतर्गत शासकीय देयकों एवं सब्सिडी भुगतान को संबंधित वित्तीय वर्ष में ही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस दौरान मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल के सफलतापूर्वक 12 वर्ष पूर्ण हुए हैं। विकास के कार्य तेज गती से किए जा रहे हैं। मध्‍यप्रदेश भी कदम से कदम मिलाकर चल रहा है। 

इतने सारे काम कर रहा प्रशासन

बैठक में बताया गया कि इस बार के सिंहस्‍थ में लगभग 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। उज्‍जैन के अलावा अन्‍य जिलों में 25 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि के विभिन्‍न प्रकार के कार्य किए जा रहे हैं। इन कार्यों में सड़के, सेतु, नवीन घाट निर्माण और शहर के बुनियादी ढांचे के विकास से संबंधित कई महत्‍वपूर्ण योजनाएं सम्मिलित हैं। इसके अलावा उज्‍जैन में सिंहस्‍थ के दौरान शिप्रा नदी के जल से स्‍नान हो सके इसके लिए सेवरखेडी-सिलारखेडी परियोजना पर कार्य किया जा रहा है। इसके अलावा 919 करोड़ की लागत से कान्‍ह-क्‍लोज डक्‍ट डायवर्सन परियोजना पर कार्य किया जा रहा है, ताकि शिप्रा नदी में दूषित जल न मिल सके। इसके अलावा 778 करोड़ रुपए की लागत से 29 किमी से अधिक नवीन घाटों का निर्माण किया जा रहा है और 120 करोड़ रुपए की लागत से मौजुदा स्‍थाई घाटों का उन्‍नयन कार्य भी किया जा रहा है। इशशए 4 करोड़ से अधिक श्रद्धालु 24 घंटे में स्‍नान कर सकेंगे। उज्‍जैन की कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए 1692 करोड़ रुपए की लागत से उज्‍जैन-इंदौर 6 लेन मार्ग, 2,935 करोड़ रुपए की लागत से उज्‍जैन - इंदौर ग्रीनफिल्‍ड मार्ग, 5,017 करोड़ रुपए की लागत से उज्‍जैन-जावरा 4 लेन मार्ग, 2,523 करोड़ रुपए की लागत से उज्‍जैन-झालावाड 4 लेन मार्ग, 351 करोड़ रुपए की लागत से उज्‍जैन - मक्सी 4 लेन मार्ग का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा शहर की आंतरिक सड़कों का निर्माण एवं चौडीकरण कार्य भी किया जा रहा है।

बनाए जा रहे कई ब्रिज

बैठक में बताया गया कि सिंहस्‍थ के अंतर्गत 22 से अधिक नए पुल, 5 रेल्‍वे ओवर ब्रिज, 17 नदी पुल का निर्माण भी किया जा रहा है। सिंहस्‍थ के दौरान रियल टाईम निगरानी, भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए केंद्रीयकृत डि‍जिटल कमांड प्‍लेटफार्म बनाया जाएगा। 3 हजार हेक्‍टेयर से अधिक क्षेत्रफल में कुल 30 पार्किंग सेंक्‍टर बनाए जाएंगे। एसीएस डॉ. राजेश राजैारा ने जानकारी दी कि पार्किंग और होल्डिंग एरिया के लिए आस-पास के जिलों में भी व्‍यवस्‍था की जाएगी। उज्‍जैन शहर जल आवर्धन योजना के अंतर्गत 1,133 करोड़ रुपए की लागत से 200 एमएलडी जल शोधन संयंत्र, 700 से अधिक किमी का पाईपलाईन नेटवर्क, 17 नए ओवरहेड टेंक, 49,087 नए पेय जल कनेक्‍शन किए जाएंगे। इस बार का सिंहस्‍थ जीरो वेस्‍ट सिंहस्‍थ होगा। सिंहस्‍थ को हरित सिंहस्‍थ बनाने के लिए 20 मेगावॉट की सोलर संयंत्र क्षमता प्रस्तावित है, जिससे 3.2 करोड़ युनिट का अनुमानित वार्षिक विद्युत उत्‍पादन किया जाएगा। उज्‍जैन में निर्माणाधीन 550 बेड के सर्वसुविधा युक्‍त मेडिकल कॉलेज भवन और संबंधित हॉस्‍टल सुविधाओं के बारे में जानकारी दी गई। बताया गया कि 46 करोड़ रुपए की लागत से आईटी पार्क का निर्माण भी तेज गति‍ से किया जा रहा है

सौर और पवन ऊर्जा पर फोकस

बैठक में केंद्रीय मंत्री खट्टर और मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव द्वारा प्रदेश में ऊर्जा और रिवेम्‍प्‍ड डिस्‍ट्रीब्‍यूशन सेक्‍टर स्किम की समीक्षा भी की गई। बैठक में बताया गया कि आरडीएसएस योजना के तहत प्रदेश में विद्युत वितरण प्रणाली का सुदृणिकरण किया गया है। वर्ष 2020-21 में राज्‍य स्‍तर पर एटीएंडसी हानियां 41.55 प्रतिशत थी जो वर्ष 2025-26 में घट कर 25.68 प्रतिशत रह गई है। बैठक में मंत्री खट्टर ने निर्देश दिए कि पीएम सूर्य घर योजना के अंतर्गत अधिक से अधिक कनेक्‍शन किए जाएं। लोगों को इसके लिए प्रोत्‍साहित किया जाए। कुसुम योजना के अंतर्गत किसानों को लाभांवित किया जाए ताकि अन्‍नदाता ऊर्जा दाता भी बन सके। सौर ऊर्जा के साथ-साथ पवन ऊर्जा को भी बढ़ावा दिया जाए। इसके अंतर्गत संयंत्र स्‍थापित किए जाए। केंद्रीय मंत्री खट्टर ने कहा कि सिंहस्थ-2028 के दौरान लगभग 230 मेगावाट विद्युत ऊर्जा की खपत होने की संभावना को दृष्टिगत रखते हुए नवीन विद्युत अधोसंरचना के विकास हेतु व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं।

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