गोरखपुर। भगवान परशुराम के स्वरूप को लेकर कथित रूप से बनाए गए आपत्तिजनक चित्र और उसके सार्वजनिक प्रदर्शन को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले में ब्राह्मण समाज की ओर से प्रशासन को शिकायत भेजकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।
सूत्रों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्य प्रशांत त्रिपाठी ने एसएसपी गोरखपुर और संबंधित अधिकारियों को ई-मेल के माध्यम से एक विस्तृत शिकायत भेजी है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान भगवान परशुराम के स्वरूप को एक जीवित राजनीतिक व्यक्ति से जोड़कर प्रदर्शित किया गया, जिससे ब्राह्मण समाज सहित अनेक हिंदू धर्मावलंबियों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
क्या हैं मुख्य आरोप?
शिकायत में कहा गया है कि भगवान परशुराम सनातन धर्म के अत्यंत पूजनीय आराध्य हैं और किसी जीवित व्यक्ति को उनके स्वरूप में प्रस्तुत करना धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं के विपरीत है। आरोप है कि इस कृत्य से समाज में भ्रम फैलाने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का प्रयास किया गया।
जांच के दायरे में कौन?
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि—
कार्यक्रम के आयोजकों की पहचान की जाए।
पोस्टर और प्रचार सामग्री तैयार करने वालों की भूमिका की जांच हो।
कार्यक्रम में शामिल व्यक्तियों और सहयोगियों की जिम्मेदारी तय हो।
यह पता लगाया जाए कि इस पूरे आयोजन के पीछे किसका निर्देश या संरक्षण था।
यदि धार्मिक भावनाएं भड़काने अथवा सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का उद्देश्य पाया जाता है तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए।
बढ़ सकता है विवाद
इस शिकायत के सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया और विभिन्न संगठनों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। ब्राह्मण समाज के कई लोगों ने इसे आस्था से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासन की निगाहें जांच पर
फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर शिकायत प्राप्त होने के बाद मामले की जांच की संभावना जताई जा रही है। यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।