झारखंड राज्यसभा चुनाव में राजनीतिक समीकरणों को झटका देने वाला परिणाम सामने आया है। राज्यसभा की दो सीटों के लिए हुए चुनाव में एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम ने जीत हासिल की है। हालांकि देर शाम तक निर्वाचन आयोग की ओर से औपचारिक घोषणा नहीं की गई थी, लेकिन मतगणना से जुड़े सूत्रों ने दोनों उम्मीदवारों की जीत की पुष्टि कर दी।
जानकारी के अनुसार, परिमल नाथवानी को कुल 28 वोट प्राप्त हुए, जिससे उनकी जीत सुनिश्चित हो गई। वहीं झामुमो उम्मीदवार बैद्यनाथ राम भी आवश्यक मत हासिल कर राज्यसभा पहुंचने में सफल रहे। इस परिणाम के साथ झारखंड से राज्यसभा की दोनों सीटों पर अलग-अलग राजनीतिक खेमों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो गया है।
सभी अनुमानों को गलत साबित कर दिया
सबसे बड़ा झटका कांग्रेस और महागठबंधन को लगा है। महागठबंधन की ओर से उम्मीदवार बनाए गए कांग्रेस नेता प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा में संख्या बल को देखते हुए महागठबंधन की स्थिति मजबूत मानी जा रही थी, लेकिन नतीजों ने सभी अनुमानों को गलत साबित कर दिया।
मतदान के बाद तीन वोटों को लेकर लंबे समय तक संशय बना रहा। राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बताया कि इन वोटों को पहले होल्ड पर रखा गया था। बाद में इन्हें अमान्य घोषित किए जाने की सूचना सामने आई, जिससे चुनावी गणित पूरी तरह बदल गया।
उनकी जीत का रास्ता आसान हुआ
चुनाव परिणाम के बाद महागठबंधन में क्रॉस वोटिंग की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार, कुछ सहयोगी दलों के विधायकों ने अपेक्षित लाइन से हटकर मतदान किया, जिसका सीधा नुकसान कांग्रेस उम्मीदवार को हुआ। इसी का लाभ परिमल नाथवानी को मिला और उनकी जीत का रास्ता आसान हुआ।
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने परिमल नाथवानी को बधाई देते हुए इसे एनडीए की बड़ी राजनीतिक जीत बताया। उन्होंने कहा कि इस परिणाम ने महागठबंधन की एकजुटता और आंतरिक समन्वय पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चुनाव नतीजों के बाद झारखंड की राजनीति में नई चर्चाओं और संभावित राजनीतिक बदलावों का दौर शुरू हो गया है।