भोपाल में मानसून की आधिकारिक दस्तक से पहले हुई बारिश ने नगर निगम और प्रशासन की तैयारियों की हकीकत सामने ला दी है। महज कुछ मिनटों की बारिश में शहर की कई प्रमुख सड़कें जलमग्न हो गईं। कई इलाकों में सड़कें तालाब जैसी नजर आईं, जिससे यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई। जलभराव के कारण लोगों को घंटों जाम का सामना करना पड़ा और कई स्थानों पर एम्बुलेंस तक फंस गईं।
स्थायी समाधान अब तक नहीं निकाला गया
शहर के पुराने और नए दोनों हिस्सों में बारिश का असर देखने को मिला। बोर्ड ऑफिस से ज्योति टॉकीज तक की सड़क पर पानी भरने से वाहन चालकों को भारी परेशानी हुई। तीन महीने से चल रहे सड़क मरम्मत कार्य के बावजूद थोड़ी सी बारिश में ही सड़क जलमग्न हो गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या हर साल सामने आती है, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं निकाला गया है।
चार महीने पहले सीवेज पाइपलाइन डालने के लिए शहर की कई सड़कों को खोदा गया था, लेकिन उनका पुनर्निर्माण अब तक पूरा नहीं हो सका है। बारिश के दौरान इन गड्ढों में पानी भरने से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। कई कॉलोनियों में अधूरी सड़कें लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं।
शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई
कमलापति स्टेशन रोड, एमपी नगर, सात नंबर रोड और अरेरा कॉलोनी जैसे प्रमुख इलाकों में भी जलभराव देखने को मिला। वहीं शहर के कई हिस्सों में खुले नाले लोगों की जान के लिए खतरा बने हुए हैं। बागसेवनियां से कटारा हिल्स मार्ग पर घरों के सामने बह रहा खुला नाला स्थानीय निवासियों की चिंता बढ़ा रहा है। लोगों का कहना है कि कई बार बच्चे नाले में गिर चुके हैं, लेकिन शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
मानसून पूर्व तैयारियों के निगम के दावों के बीच पहली ही बारिश ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर राजधानी भोपाल मानसून के लिए कितनी तैयार है।