Parijat Plant Vastu Tips: पारिजात का पौधा अपनी अनोखी सुंदरता के लिए जाना जाता है। केसरिया तना और सफेद पंखुड़ियों वाले इसके छोटे फूल बेहद आकर्षक होते हैं। इसे अंग्रेजी में नाइट ब्लूमिंग जैस्मीन और आम भाषा में रात की रानी भी कहते हैं।
यह पौधा न केवल सजावटी है, बल्कि आयुर्वेद और होम्योपैथी में औषधीय गुणों के कारण भी महत्वपूर्ण है। इसके फूल सितंबर के अंत से दिसंबर तक खिलते हैं और मुख्य रूप से शाम या रात में खुलकर चारों ओर खुशबू बिखेरते हैं।
पारिजात से जुड़ी पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने पारिजात का पौधा स्वर्ग से पृथ्वी पर लाया था। सत्यभामा और रुक्मिणी के बीच इस पौधे को लेकर विवाद हो गया। तब कृष्ण ने चतुराई से पौधा सत्यभामा के आंगन में लगाया, लेकिन इस प्रकार लगाया कि उसके फूल रुक्मिणी के आंगन में गिरें।
धार्मिक मान्यता है कि, देवी लक्ष्मी को पारिजात के फूल अत्यंत प्रिय हैं। जहां पारिजात के फूल खिलते हैं, वहां देवी लक्ष्मी का वास माना जाता है।

घर में पारिजात लगाना शुभ या अशुभ?
पारिजात का पौधा घर में लगाना शुभ माना जाता है। वास्तु और धार्मिक दृष्टि से इसे अशुभ नहीं, बल्कि अत्यंत लाभकारी माना जाता है। इसकी सुगंध तनाव कम करती है, मन को शांति प्रदान करती है और घर के वातावरण को सकारात्मक बनाती है। परिवार में सुख, शांति और आनंद बढ़ाने वाला यह पौधा वास्तु दोषों को भी कम करने में सहायक होता है।
किस दिशा में लगाएं पारिजात का पौधा?
वास्तु शास्त्र के अनुसार, पारिजात का पौधा लगाने के लिए उत्तर या पूर्व दिशा सबसे उत्तम मानी जाती है। मुख्य द्वार के पास या घर के इन दिशाओं में लगाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। घर में सुख-समृद्धि और शांति का माहौल बना रहता है।