Disabled Children met Premanandaji: प्रेमानंद महाराज से मिलने पहुंचे मूक-बधिर बच...

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Disabled Children met Premanandaji: प्रेमानंद महाराज से मिलने पहुंचे मूक-बधिर बच्चे, जानिए उनसे क्या कहा?

disabled children met premanandaji प्रेमानंद महाराज से मिलने पहुंचे मूक-बधिर बच्चे जानिए उनसे क्या कहा

मूक -बधिर बच्चों ने की महाराज जी से मुलाकात इन बच्चों को जो महिला लेकर आई थी उनका नाम मनप्रीत कौर है। उन्होंने महाराज जी से पूछा- 'महाराज जी कुछ लोग पागल कहते हैं, कुछ लोग चालाक कहते हैं। हम अपनी मौज में काम कर रहे हैं। जितने हमारे साथ लोग जुड़े हैं, सब अपनी मौज में काम कर रहे हैं। आपसे बस आशीर्वाद हमें चाहिए कि हम सबका धैर्य ना टूटे। हम सब की हिम्मत बनी रहे।'

प्रेमानंद महाराज जी का जबाव

प्रेमानंद महाराज ने जबाव देते हुए कहा कि-'बड़े सौभाग्य की बात है कि आप मां का वात्सल्य लेकर ऐसे बच्चों का भी पालन पोषण कर रहे हैं। ऐसे बच्चों को भी उत्साह दे रहे हैं, नहीं तो ऐसे बच्चे जीवन से निराश हो जाते हैं। आप बहुत धन्यवाद के पात्र हैं। आप ऐसे ही करते रहिए। लोग क्या जानें ये सब। सब स्वार्थी लोग हैं। आप परमार्थ में चल रही हैं। ये शुद्ध परमार्थ है। क्योंकि ऐसे ऐसों के मन में उत्साह, ऐसों को प्यार देना, ऐसे को दुलार देना, ये आपकी महानता है।'

महिला ने फिर पूछा कि-

'महाराज जी हम इन बच्चों को पढ़ा रहे हैं। इन बच्चों के सामाजिक उत्थान का प्रयास कर रहे हैं। इन बच्चों को अध्यात्म से कैसे जोड़ें? हमें वह मार्गदर्शन दीजिए।'

महाराज जी ने नाम जप करने की दी सलाह

प्रेमानंद महाराज ने इस पर जबाव देते हुए कहा कि- 'अगर किसी भी तरह नाम जप करने लगे, प्रभू का स्मरण करने लगे, मतलब आपके निर्देशन से तो बात बन जाए। राधा, राधा, राधा... तो इनका हृदय निर्मल होने लगेगा। निष्पाप होने लगेंगे। इसका मंगल होने लगेगा।'

 

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बच्चों ने महाराज जी को सुनाया भजन
बच्चों ने महाराज जी से भजन सुनाने की अनुमति ली और हाथों में फूल माला और कुमकुम से राधा-कृष्ण जैसा श्रृंगार करके मूक - बधिर बच्चों ने भजन गाया– 'अरे मन ले चल वृंदावन… अरे मन ले चल वृंदावन यमुना के तट लेके चल… ले चल राधा के चरणन अरे मन ले चल वृंदावन… बंसीवट… श्रृंगार वट और केशी घाट राधा बात करनी है रज वंदन… अरे मन ले चल वृंदावन अरे मन ले चल यमुना के तट… ले के चल राधा के चरणन।'
महाराज जी हुए मंत्रमुग्ध
बच्चों की प्रस्तुति देखकर प्रेमानंद महाराज जी बहुत खुश हुए। हाथ जोड़कर उनके भजन में लीन हो गए। उनकी प्रस्तुती के बाद महाराज जी ने बोला कि-' बहुत बड़ी सुंदर प्रस्तुति। प्रेमानंद महाराज ने मनप्रीत कौर के इस तरह के बच्चों की सेवा और शिक्षा पर सराहना की है।'  

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