मध्य प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले नगर निगम और नगर पालिका चुनावों की तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य सरकार ने महापौर और नगरपालिका अध्यक्ष पदों के आरक्षण की प्रक्रिया शुरू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग को आरक्षण प्रक्रिया के लिए अधिकृत अधिकारी नियुक्त किया है।नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, आगामी नगरीय निकाय चुनावों में महापौर और अध्यक्ष पदों का आरक्षण मध्यप्रदेश नगरपालिका (महापौर और अध्यक्ष पद का आरक्षण) नियम, 1999 के तहत किया जाएगा।
आयुक्त नगरीय प्रशासन करेंगे आरक्षण की कार्रवाई
राज्य सरकार ने 12 जून को जारी आदेश में स्पष्ट किया है कि नगर निगमों के महापौर और नगरपालिकाओं के अध्यक्ष पदों के आरक्षण की पूरी प्रक्रिया आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की देखरेख में संपन्न होगी।यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि आरक्षण तय होने के बाद ही नगरीय निकाय चुनावों की राजनीतिक तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी।
महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत पद आरक्षित
प्रदेश में वर्तमान आरक्षण व्यवस्था के तहत महापौर और अध्यक्ष पदों में 50 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रहती हैं। इसके अलावा अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षण संबंधित क्षेत्र की जनसंख्या के अनुपात में तय किया जाता है। अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। आरक्षण का निर्धारण रोटेशन प्रणाली के आधार पर किया जाता है ताकि हर चुनाव में अलग-अलग निकायों को अवसर मिल सके।
लॉटरी से तय होती हैं महापौर सीटें
मध्य प्रदेश के सभी 16 नगर निगमों में महापौर पद का आरक्षण चुनाव से पहले लॉटरी के माध्यम से तय किया जाता है। इस प्रक्रिया में पिछली बार आरक्षित रही सीटों को छोड़कर अन्य नगर निगमों को प्राथमिकता दी जाती है।इस व्यवस्था का उद्देश्य विभिन्न वर्गों को समान अवसर प्रदान करना और आरक्षण के लाभ का व्यापक वितरण सुनिश्चित करना है।
2022 में महापौर पदों का आरक्षण इस प्रकार था
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आरक्षण श्रेणी
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नगर निगम
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अनारक्षित
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इंदौर, जबलपुर, रीवा, सिंगरौली
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महिला (अनारक्षित)
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ग्वालियर, देवास, बुरहानपुर, सागर, कटनी
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ओबीसी महिला
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भोपाल, खंडवा
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ओबीसी
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रतलाम, सतना
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अनुसूचित जाति
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उज्जैन
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अनुसूचित जाति महिला
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मुरैना
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अनुसूचित जनजाति
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छिंदवाड़ा
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चुनावी राजनीति पर पड़ेगा असर
महापौर और नगरपालिका अध्यक्ष पदों के आरक्षण की घोषणा के बाद राजनीतिक दल संभावित उम्मीदवारों के चयन और रणनीति पर काम शुरू कर देंगे। खासतौर पर बड़े नगर निगमों जैसे भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में आरक्षण की स्थिति पर सभी दलों की नजर रहेगी।