अपने काम और बयानों से हमेशा सुर्खियों में रहने वाले मध्यप्रदेश के पिछोर से विधायक प्रीतम लोधी ने एक बार फिर नया कारनामा कर दिखाया जिससे वो फिर सुर्खियों में है.इस बार उन्होंने एक समाजिक मंच से 13 गुर्जरों को लाइन में खड़ा कर गोलियों से भून देने वाले कुख्यात डकैत को अपना दोस्त बताया।
डकैत रामबाबू को बताया दोस्त

लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की जयंती के अवसर पर प्रीतम लोधी ने डकैत रामबाबू गड़रिया की तस्वीर पर पुष्प अर्पित किए और मंच से पाल-बघेल समाज को संबोधित करते हुए कहा- कि हम एक-दूसरे के सुख-दुख के साथी थे. रामबाबू की परिस्थितियों को मैं अच्छी तरह जानता था। समाज के कुछ लोगों ने उसे इतना प्रताड़ित किया कि वह डकैत बनने पर मजबूर हो गया। अन्यथा रामबाबू ऐसा व्यक्ति नहीं था, जो डकैत बनता।प्रीतम लोधी ने आगे कहा- रामबाबू गड़रिया परिस्थितियों का शिकार था। उसकी परिस्थितियां मुझे अच्छी तरह मालूम थीं। समाज के कुछ लोगों ने उसे इतना परेशान किया कि वह डकैत बनने पर मजबूर हो गया। अन्यथा रामबाबू ऐसा व्यक्ति नहीं था, जो डकैत बनता।
जेल में हुई थी डकैत से मुलाकात
प्रीतम ने कहा कि उन्हें रामबाबू के जीवन से जुड़ी कई घटनाएं आज भी याद हैं। मुझे उसकी जेल से लेकर जंगल तक की एक-एक बात याद है। हमारी मुलाकात जेल में भी हुई थी और जंगल में भी हुई थी। मैं स्वयं को सौभाग्यशाली मानता हूं कि रामबाबू गड़रिया की तस्वीर पर माल्यार्पण करने का अवसर मिला।
जिस तरह रामबाबू का साथ दिया, वैसे ही पाल-बघेल समाज का भी साथ दूंगा
विधायक ने कहा- जिस तरह मैंने रामबाबू के परिवार का साथ दिया था, उसी तरह आज मैं शपथ लेता हूं कि पाल-बघेल समाज का भी साथ दूंगा। कभी पीछे नहीं हटूंगा। हमारी संस्कृति न अत्याचार करने की है और न अत्याचार सहने की। हमारी पहचान यही है कि न अन्याय करेंगे और न अन्याय सहेंगे।