मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज होने के बाद राजनीतिक विवाद और गहरा गया है। मामले को लेकर कांग्रेस के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को नई दिल्ली स्थित भारत निर्वाचन आयोग से मुलाकात कर रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) के फैसले को चुनौती दी। प्रतिनिधिमंडल में अभिषेक मनु सिंघवी, केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश, रणदीप सुरजेवाला, सचिन पायलट, भूपेश बघेल, विवेक तन्खा सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल रहे।
अभी तक मामले में संज्ञान भी नहीं लिया
निर्वाचन आयोग से मुलाकात के बाद कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द करने का फैसला कानून के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस आधार पर नामांकन निरस्त किया गया, उसका चुनावी नियमों में कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। सिंघवी के अनुसार हैदराबाद की एक अदालत द्वारा भेजे गए नोटिस को लंबित आपराधिक मामला मान लिया गया, जबकि अदालत ने अभी तक मामले में संज्ञान भी नहीं लिया है।
अदालत आरोप तय कर चुकी
उन्होंने बताया कि चुनाव आयोग के नियमों के तहत उम्मीदवार को केवल उन्हीं मामलों की जानकारी देना अनिवार्य होता है, जिनमें दो वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रावधान हो और अदालत आरोप तय कर चुकी हो। इस मामले में ऐसी कोई स्थिति नहीं थी, इसलिए नामांकन रद्द करना उचित नहीं कहा जा सकता।
दो घंटे के भीतर निर्णय लेने का आश्वासन दिया
कांग्रेस ने आयोग से मांग की है कि रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को निरस्त कर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन बहाल किया जाए। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बताया कि चुनाव आयोग ने मामले पर दो घंटे के भीतर निर्णय लेने का आश्वासन दिया है।
इधर भोपाल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। वहीं भाजपा का आरोप है कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने शपथ पत्र में एक लंबित मामले की जानकारी छिपाई थी, जिसके चलते उनका नामांकन रद्द किया गया।